कौन चलाता है बद्रीनाथ धाम, जानें गर्भगृह से लेकर तिजोरी तक कैसे होता है काम

कौन चलाता है बद्रीनाथ धाम, जानें गर्भगृह से लेकर तिजोरी तक कैसे होता है काम

देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि चढ़ावे के प्रबंधन पर सवाल उठने लगें तो इसका असर केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रहता बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास पर भी पड़ता है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आने के बाद अब पूरा मामला सरकारी जांच के दायरे में पहुंच गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों और स्थानीय संगठनों की मांग के बाद उत्तराखंड सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी गई है। यह समिति पूरे मामले की विस्तार से जांच करेगी।

तीन सदस्यीय जांच समिति करेगी पूरे मामले की पड़ताल

सरकार ने केवल विभागीय जांच पर भरोसा करने के बजाय स्वतंत्र जांच कराने का फैसला लिया है। इसके लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की समिति बनाई गई है।

गढ़वाल मंडल के आयुक्त आनंद स्वरूप को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। उनके साथ उत्तराखंड राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक संदीप तिवारी और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वित्त निदेशक जगत सिंह चौहान भी सदस्य हैं।

समिति मंदिर के वित्तीय रिकॉर्ड, दान की गिनती की प्रक्रिया और पूरे लेखा-जोखा की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ भी की जाएगी।

एक कर्मचारी निलंबित, CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे

मामले के सामने आने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है।

समिति अध्यक्ष के निजी सहायक प्रमोद नौटियाल को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार शिकायत मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने पहले ही चार सदस्यीय आंतरिक जांच टीम बनाई थी। इस टीम ने गिनती कक्ष और गर्भगृह के आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखनी शुरू कर दी थी।

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध फुटेज से अभी तक आरोपों की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी वजह से तकनीकी और फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।

सोशल मीडिया के दावों के बाद बढ़ा विवाद

पूरे विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ पोस्ट से हुई। इन पोस्ट में दावा किया गया कि मंदिर में आने वाले गुप्त दान और नकद चढ़ावे के प्रबंधन में कुछ कर्मचारी मिलकर अनियमितता कर रहे हैं।

इन आरोपों के बाद स्थानीय धार्मिक संगठन 'भैरव सेना' ने भी खुलकर विरोध जताया। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग भी की है।

क्या है बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति

बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों का संचालन किसी निजी ट्रस्ट या पुजारियों के समूह द्वारा नहीं किया जाता।

इन दोनों धामों का प्रबंधन 'श्री बद्रीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर अधिनियम 1939' के तहत गठित बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति यानी BKTC करती है।

यह समिति उत्तराखंड सरकार की निगरानी में काम करती है। समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति राज्य सरकार करती है जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासनिक और कानूनी जिम्मेदारियां संभालते हैं। समिति में सरकार, स्थानीय प्रतिनिधियों और धार्मिक संस्थाओं के नामित सदस्य भी शामिल रहते हैं।

केवल पूजा नहीं, बड़े वित्तीय प्रबंधन की भी जिम्मेदारी

BKTC की जिम्मेदारी केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है। समिति बद्रीनाथ, केदारनाथ और उनसे जुड़े कई मंदिरों में मिलने वाले दान, नकद राशि, सोना-चांदी और अन्य संपत्तियों का प्रबंधन करती है।

इसके अलावा मंदिर परिसरों, अतिथि गृहों और अन्य संपत्तियों का रखरखाव भी समिति के जिम्मे होता है। चार धाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने पर सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और अन्य व्यवस्थाओं में भी समिति जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करती है। हर वर्ष वित्तीय ऑडिट कराना और रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना भी इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।

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