IIM में आदिवासी छात्रा से भेदभाव का आरोप, डिप्रेशन में पीड़िता
झारखंड की राजधानी रांची स्थित प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM रांची) से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। संस्थान में पीएचडी (Ph.D.) कर रही एक आदिवासी छात्रा ने प्रबंधन पर उसकी जनजातीय पहचान (Tribal Identity) के कारण मानसिक प्रताड़ना और जातिगत भेदभाव करने का संगीन आरोप लगाया है।
न्याय की गुहार लेकर पीड़ित छात्रा ने सीधे राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) का दरवाजा खटखटाया है। इस हाई-प्रोफाइल शिकायत के बाद राष्ट्रीय आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आईआईएम रांची में एक आपातकालीन समीक्षा बैठक बुलाई और प्रबंधन से पूरे मामले पर लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है।
बीआईटी मेसरा से पास होने के बावजूद मारे जाते हैं ताने
अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से ताल्लुक रखने वाली पीड़ित छात्रा प्रियंका कुजूर ने अपने माता-पिता के साथ सोमवार को रांची के सर्किट हाउस का दौरा किया। वहां उन्होंने आईआईएम रांची प्रबंधन के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए एनसीएसटी (NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकरा से मुलाकात की।
प्रियंका ने आयोग के सामने रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) से स्नातक (Graduation) करने के बावजूद संस्थान में उन्हें लगातार निशाना बनाया जाता है। प्रियंका का आरोप है कि प्रोफेसरों और प्रबंधन द्वारा उन्हें अक्सर ताने मारे जाते हैं, मानसिक रूप से "कमजोर" कहा जाता है, और परीक्षाओं व असाइनमेंट में अंक (Marks) देने के दौरान भी उनकी पृष्ठभूमि के कारण उनके साथ खुला भेदभाव किया जाता है।
प्रियंका के माता-पिता ने आयोग के समक्ष गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आईआईएम रांची प्रबंधन का यह अड़ियल और प्रताड़नापूर्ण रवैया उनकी बेटी को गंभीर अवसाद (Depression) की ओर धकेल रहा है।