ध्वनि की गति से 3 गुना तेज हमला, कभी हथियार खरीदने वाला भारत अब बेच रहा है दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल
वैश्विक रक्षा बाजार और कूटनीति के पटल से भारत के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आ रही है। कभी दुनिया के सबसे बड़े हथियार आयातक देशों की सूची में शुमार रहने वाला भारत अब तेजी से अपनी महाविनाशक और अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों का निर्यात कर दुनिया का नया डिफेंस हब बनकर उभर रहा है।
भारत की यह रणनीतिक कामयाबी सोमवार को उस वक्त एक नए शिखर पर पहुंच गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और एस्ट्रा बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल के एक्सपोर्ट के लिए कई ऐतिहासिक रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
रणनीतिक साझेदारी के तहत घोषित इस मेगा डील के साथ ही इंडोनेशिया भारतीय मिसाइल तकनीक को अपनी सेना में शामिल करने वाला नया शक्तिशाली देश बन गया है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ा भारत का कद
इंडोनेशिया के साथ हुआ यह ताजा रक्षा समझौता भारतीय मिसाइल प्रणालियों को खरीदने वाले देशों की बढ़ती सूची में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ता है। यह मील का पत्थर हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र और उससे आगे एक बेहद विश्वसनीय, आधुनिक और आत्मनिर्भर रक्षा आपूर्तिकर्ता (Defense Supplier) बनने के नई दिल्ली के वैश्विक प्रयासों को सीधे तौर पर दर्शाता है। इस सौदे से न केवल भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक कूटनीति में भी भारत की धाक मजबूत होगी।
भारत की मिसाइल निर्यात नीति में 'ब्रह्मोस' (BrahMos) सबसे बड़ी सफलता और प्रमुख चेहरा बनकर उभरी है। भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह मिसाइल दुनिया की सबसे तीव्र और सटीक परिचालन क्षमता वाली सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
मैक 3 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज) की रफ्तार से हमला करने वाली इस मिसाइल को जमीन, समुद्र, पनडुब्बियों और लड़ाकू विमानों से बेहद आसानी से दागा जा सकता है। इसे नौसैनिक और जमीनी दोनों तरह के ठिकानों को पिन-पॉइंट सटीकता के साथ पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए डिजाइन किया गया है।