एलन मस्क के Grok AI ने कराई ईरान पर मिसाइल बारिश: अमेरिकी अदालत में पेंटागन का सबसे बड़ा और सनसनीखेज कबूलनामा

एलन मस्क के Grok AI ने कराई ईरान पर मिसाइल बारिश: अमेरिकी अदालत में पेंटागन का सबसे बड़ा और सनसनीखेज कबूलनामा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ निबंध लिखने या तस्वीरें बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आधुनिक युद्ध का सबसे खतरनाक हथियार बन चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान युद्ध को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियों और टेक जगत में हड़कंप मचा दिया है। 'द इंडिपेंडेंट' की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना (पेंटागन) ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान हजारों मिसाइलें दागने और सटीक ठिकानों को लॉक करने के लिए एलन मस्क के चर्चित एआई चैटबॉट 'ग्रोक' (Grok) का इस्तेमाल किया है। यह इतिहास में पहली बार है जब अमेरिकी सरकार ने सार्वजनिक और आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि वे युद्ध के मैदान में एलन मस्क की तकनीक से सीधी मदद ले रहे हैं।

यह चौंकाने वाला सच तब सामने आया जब अमेरिका की एक अदालत में मस्क की कंपनी xAI के खिलाफ चल रहे एक मुकदमे के दौरान पेंटागन के एक शीर्ष रक्षा अधिकारी ने हलफनामा दायर कर दलीलें पेश कीं।

प्रदूषण के केस में मस्क का बचाव करने उतरी अमेरिकी सेना, खुला 'ग्रोक' का टॉप सीक्रेट मिशन

दरअसल, एलन मस्क की एआई कंपनी xAI पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने और प्रदूषण फैलाने के गंभीर आरोपों को लेकर अमेरिकी अदालत में एक कानूनी मुकदमा चल रहा है। इस मामले में मस्क की कंपनी का पुरजोर बचाव करते हुए पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने कोर्ट में एक आधिकारिक शपथ पत्र (Affidavit) जमा किया।

पेंटागन के मुख्य डिजिटल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अधिकारी कैमरन स्टेनली ने कोर्ट फाइलिंग में साफ तौर पर कहा कि इस चैटबॉट (Grok) का चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के काम करते रहना सीधे तौर पर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) से जुड़ा हुआ मामला है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि हाल ही में एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान महज 96 घंटों के भीतर ईरान के 2,000 से अधिक अलग-अलग खुफिया ठिकानों पर मिसाइलें दागने और सटीक टारगेटिंग सेट करने के लिए इसी ग्रॉक एआई का इस्तेमाल किया गया था।

अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के लिए स्पेशल डिजाइन हुए हैं एलन मस्क के 4 गुप्त एआई मॉडल

पेंटागन के अधिकारी के मुताबिक, xAI का जेनेरेटिव एआई चैटबॉट 'ग्रोक' उन चार चुनिंदा एआई मॉडलों में शामिल है जो अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी की बेहद गोपनीय और संवेदनशील जरूरतों को संभालने में सक्षम हैं। कैमरन स्टेनली ने अदालत को बताया कि पेंटागन वर्तमान में xAI के कुछ बेहद खास और खुफिया मॉडलों पर पूरी तरह निर्भर है। इन मॉड्यूल्स को विशेष रूप से अमेरिकी मिलिट्री और खुफिया एजेंसियों की सामरिक रणनीतियों को ध्यान में रखकर कोड और डिजाइन किया गया है, जो पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों का पूरा डेटाबेस खंगाल देते हैं।

ईरानी शहर मीनाब के स्कूल पर हुए हमले से जुड़े तार, 150 मासूम बच्चों की मौत पर उठे सवाल

अमेरिका का यह कुबूलनामा ऐसे नाजुक समय पर आया है जब ईरान के एक स्कूल पर हुए विनाशकारी अमेरिकी हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी थू-थू हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी शहर मीनाब में एक लड़कियों के स्कूल पर अमेरिकी वायुसेना द्वारा की गई भीषण बमबारी में कम से कम 150 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस नरसंहार के बाद से ही मिलिट्री ऑपरेशन्स में एआई सिस्टम के अंधाधुंध इस्तेमाल पर वैश्विक मानवाधिकार संगठनों ने कड़े सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कई रक्षा विश्लेषकों का पुख्ता मानना है कि मीनाब के इस स्कूल को निशाना बनाने के पीछे पेंटागन की इसी एआई-संचालित टारगेटिंग (AI-driven targeting error) की कोई तकनीकी खामी या गलत इनपुट जिम्मेदार था, जिसने मासूमों की कब्र खोद दी।

इजरायल से लेकर अमेरिका तक, आधुनिक युद्धों में तेजी से पैर पसार रहा है एआई का खूनी खेल

सैन्य अभियानों और खुफिया रणनीतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने वाला अमेरिका दुनिया का इकलौता देश नहीं है। आज दुनिया भर की महाशक्तियां युद्ध के मैदान में खुफिया जानकारी जुटाने, जासूसी करने और संभावित ठिकानों को ऑटोमैटिक ट्रैक करने के लिए एआई टूल्स का सहारा ले रही हैं। इससे पहले इजरायली सेना (IDF) भी गाजा पट्टी में हमास के शीर्ष कमांडरों और बंधकों का सटीक पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर एआई सॉफ्टवेयर का उपयोग करने की बात स्वीकार कर चुकी है। तकनीक के इस सैन्यीकरण ने अब इंसानी विवेक और युद्ध के नियमों के अस्तित्व पर ही एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

 

 

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