अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की खुली पोल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बोले— 'पाक में प्रेस की आजादी नहीं, इसीलिए ईरान समझौते में हुई देरी'
अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम शांति समझौते को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला कूटनीतिक मोड़ सामने आया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने एक इंटरव्यू के दौरान इस महा-समझौते के नियमों को दुनिया के सामने लाने में हुई दो दिनों की देरी के लिए सीधे तौर पर पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) और कतर की प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। उपराष्ट्रपति वेंस ने तीखा हमला बोलते हुए साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान जैसे देशों में प्रेस की स्वतंत्रता (Freedom of Press) का स्तर बेहद खराब है, जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय दस्तावेजों को समय पर पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करने में बड़ी रुकावट पैदा हुई।
पॉडकास्ट में बोले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस— कतर और पाकिस्तान में जनता से छुपाई जाती हैं बातें
मशहूर अमेरिकी पत्रकार और थिंकर रॉस डौथैट के विशेष पॉडकास्ट 'इन्ट्रेस्टिंग टाइम्स विद रॉस डौथैट' (Interesting Times with Ross Douthat) में बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने इस देरी के पीछे की इनसाइड स्टोरी साझा की। वेंस ने खुलासा किया कि अमेरिकी प्रशासन इस महत्वपूर्ण शांति समझौते के सभी मूल दस्तावेजों को तय योजना के मुताबिक 15 जून 2026 को ही पूरी दुनिया के सामने लाइव करना चाहता था, लेकिन इसे जारी करने में दो दिन और लग गए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और कतर की व्यवस्थाओं में अमेरिका जैसी स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतांत्रिक चेतना का सर्वथा अभाव है। वहां की सरकारों से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वे किसी अंतरराष्ट्रीय समझौते की बारीक से बारीक बातों को अपनी जनता के सामने निष्पक्ष विश्लेषण के लिए खुला रखें।
क्या है अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन, जिसका वेंस ने दिया हवाला
अपनी बात को तर्कसंगत ढंग से रखते हुए जेडी वेंस ने अमेरिकी लोकतांत्रिक मूल्यों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हम समझौते के दस्तावेज तुरंत जारी करना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तान और कतर में अमेरिकी संविधान के प्रसिद्ध 'प्रथम संशोधन' (First Amendment) जैसी प्रेस की आजादी और बोलने का अधिकार नहीं है। अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन वहां की मीडिया को बिना किसी सरकारी सेंसरशिप या डर के काम करने, शांतिपूर्ण सभा आयोजित करने और सीधे सरकार से तीखे सवाल पूछने की खुली कानूनी गारंटी देता है। वेंस के मुताबिक, पाकिस्तान जैसी जगहों पर यह सोच ही गायब है कि जनता को समझौते की हर बात पता होनी चाहिए ताकि वे स्वतंत्र रूप से सवाल उठा सकें।
विपक्ष के सवालों से घिरा था ट्रंप प्रशासन, वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाक की हालत पस्त
दरअसल, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यह तीखा बयान अमेरिकी राजनीति में उठे एक आंतरिक विवाद के बाद आया है। विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेताओं ने ट्रंप प्रशासन से यह कड़ा सवाल पूछा था कि जब 15 जून को ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने इस ऐतिहासिक अंतरिम समझौते का एलान कर दिया था, तो इसके आधिकारिक कागजात दुनिया के सामने लाने में दो दिनों की रहस्यमयी देरी क्यों की गई? इसी सवाल का जवाब देते हुए वेंस ने पाकिस्तान की खराब प्रेस व्यवस्था को घेरा। आपको बता दें कि 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' (RSF) द्वारा जारी साल 2026 की ताजा 'विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक' रैंकिंग में भी पाकिस्तान दुनिया के 180 देशों में बेहद शर्मनाक 153वें स्थान पर खिसक चुका है, जो वेंस के दावों को सच साबित करता है।
वैश्विक बाजारों को राहत देने वाला है अमेरिका-ईरान समझौता, परमाणु डील पर भी बनी बात
इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच अमेरिका-ईरान का यह अंतरिम समझौता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी माना जा रहा है। इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद युद्ध के चलते बंद पड़े होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोल दिया गया है। इस जलमार्ग के बंद होने से दुनिया भर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई ठप हो गई थी और कीमतें आसमान छूने लगी थीं। समझौते की शर्तों के अनुसार, अमेरिका और ईरान अब परमाणु कार्यक्रम पर अपनी रुकी हुई बातचीत को नए सिरे से आगे बढ़ाएंगे। दोनों देशों के राजनयिकों को एक व्यापक और स्थाई परमाणु सौदा तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है, जिसे जरूरत के हिसाब से आगे बढ़ाया जा सकता है।