कोविड-19 से जंग में दुनिया ने जिस ‘हथियार’ को ठुकराया, उसी को आजमाएगा हिंदुस्तान

नई दिल्ली॥ कोविड-19 की वैक्सीन बनाने के लिए पूरी दुनिया कोशिश में जुटी है। उधर कई देश ये जानने की कोशिश में भी लगे हैं कि मौजूदा स्थिति में कोविड-19 से बचने के लिए कौन सी दवाई कारगर साबित होगी।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एक शोध में पाया है कि Hydroxychloroquine लेने से वायरस से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है। ये शोध इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल ही में एक शोध सामने आई थी, जिसमें बताया गया था कि इस दवाई का वायरस के विरूद्ध कोई कारगर प्रभाव नहीं है। बल्कि इस दवाई से कोविड-19 रोगियों में कार्डिएक रिस्क यानी कि हृदय संबंधी खतरा बढ़ जाता है।

वहीं मोदी सरकार ने वायरस से बचाव के लिए Hydroxychloroquine के यूज़़ को और बढ़ाने का फैसला किया है। ICMR ने मलेरिया के उपचार में प्रय़ोग की जाने वाली दवा क्लोरोक्वीन और Hydroxychloroquine के प्रयोग के लिए नई संशोधित गाइडलाइन जारी की है।

रिपोर्ट के अनुसार, अब ICMR ने इस दवाई को सभी असिम्प्टोमेटिक हेल्थ वर्कर पर प्रय़ोग करने की सलाह दी है। असिम्प्टोमेटिक फ्रंटलाइन वर्कर्स जैसे कि कंटेनमेंट जोन में काम कर रहे सर्विलांस वर्कर्स, पैरामिलिट्री फोर्स और पुलिस अफसरों को अब ये दवाई लेने को कहा जाएगा।

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खुराक को लेकर गाइडलाइन में पहले कहा गया है था कि इसे 8 हफ्ते तक इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार, इसे सप्ताहिक खुराक के तौर पर आगे भी लिया जा सकता है। हालांकि इसके लिए डॉक्टर्स की निगरानी बहुत आवश्यक होगी, साथी ही ECG पैरामीटर्स का ख्याल भी रखना होगा।

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