3 महीने से धूल फांक रही 108 एंबुलेंस, निजी गाड़ियों के सहारे मरीज, पश्चिमी सिंहभूम में स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में सुदूर ग्रामीण इलाकों की आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। झींकपानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) परिसर में जीवनरक्षक कही जाने वाली 108 एंबुलेंस बीते करीब तीन माह से खराब हालत में खड़ी धूल फांक रही है। इस आपात सेवा के ठप होने के चलते समूचे प्रखंड क्षेत्र में गंभीर मरीजों को समय पर उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाना परिजनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सड़क दुर्घटना, प्रसव पीड़ा और गंभीर बीमारियों की स्थिति में समय पर सरकारी मदद न मिलने से ग्रामीण बेबस हैं।
निजी वाहनों की मार झेलने को मजबूर गरीब परिवार
स्वास्थ्य केंद्र पर एंबुलेंस सेवा नदारद होने का सबसे बुरा असर आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है। आपातकाल के समय लोगों को महंगे किराए पर निजी गाड़ियां या निजी एंबुलेंस का इंतजाम करना पड़ता है। गरीब परिवारों के लिए ऐन वक्त पर हजारों रुपये जुटाना भारी संकट खड़ा कर देता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार झींकपानी जैसे पिछड़े इलाके के लिए यह सेवा किसी संजीवनी से कम नहीं थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते 90 दिनों बाद भी इस वाहन की मरम्मत नहीं कराई जा सकी है।
टोंटो क्षेत्र में भी चरमराई आपातकालीन सुविधाएं
परेशानी का दायरा केवल झींकपानी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सीमावर्ती टोंटो प्रखंड में भी आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बेहद बदहाल बनी हुई है। वहां भी आपात स्थिति में मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पाती और तीमारदारों को अपनी व्यवस्था से मरीज को अस्पताल ढोना पड़ता है। सुदूर जंगलों और गांवों से समय पर इलाज न मिलने के कारण कई बार मरीजों की जान पर बन आती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई त्वरित मरम्मत की मांग
ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की इस बदहाली को लेकर झींकपानी के समाजसेवी जितेंद्र गोप, जीतेंद्र कुमार और सुनील आनंद ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति गहरी नाराजगी जताई है। सामाजिक प्रतिनिधियों ने जिले के आला अधिकारियों से खराब पड़ी 108 एंबुलेंस की तत्काल तकनीकी मरम्मत कराकर सेवा फिर से बहाल करने की मांग रखी है। इसके साथ ही उन्होंने टोंटो सहित पूरे सीमावर्ती इलाके में सरकारी एंबुलेंस और स्वास्थ्य सुविधाओं को चुस्त-दुरुस्त करने की पुरजोर अपील की है ताकि किसी जरूरतमंद को इलाज के अभाव में जान न गंवानी पड़े।