संताल के रास्ते पहुंचे काले बादल, रांची समेत इन जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी
झारखंड के लोगों के लिए भीषण गर्मी और उमस के बीच राहत की सबसे बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में मानसूनी हवाओं ने संताल के रास्ते बेहद शानदार दस्तक दे दी है। पाकुड़ के पाकुड़िया समेत संताल परगना के कई हिस्सों में मॉनसून का असर साफ तौर पर दिखने लगा है, जहां आसमान में काले घने बादलों ने डेरा डाल दिया है और कई इलाकों में झमाझम बूंदाबांदी शुरू हो गई है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, इस बार मॉनसून ने पिछले साल की तुलना में पूरे पांच दिन पहले झारखंड में कदम रखा है। पिछले वर्ष जहां मॉनसून 17 जून को पहुंचा था, वहीं इस बार इसने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने अगले 24 से 48 घंटों के भीतर पूरे सूबे में मूसलाधार बारिश और तेज रफ्तार आंधी को लेकर चेतावनी जारी कर दी है। रांची से विशेष संवाददाता मोहम्मद आज़म की इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए आपके जिले में कब होगी झमाझम बारिश।
बंगाल की खाड़ी से मध्य प्रदेश तक बना मजबूत सिस्टम, अगले दो दिनों में पूरे झारखंड को तरबतर करेंगे बादल
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय झारखंड के सभी हिस्सों में मॉनसून के तेजी से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं। अंतरिक्ष में एक साथ कई मौसमी सिस्टम एक्टिव हुए हैं, जो राज्य में भारी बारिश का सबब बनेंगे। दरअसल, उत्तर-पश्चिम राजस्थान से लेकर बंगाल की खाड़ी तक एक बेहद मजबूत निम्न दबाव की ट्रफ लाइन बनी हुई है। यह ट्रफ लाइन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होते हुए सीधे बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून भी बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिम हिस्से, ओडिशा, बिहार के आधे भाग और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में पूरी तरह छा चुका है। अगले दो से तीन दिनों में यह रांची, कोल्हान के सभी जिलों, रामगढ़, हजारीबाग, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, सिमडेगा और खूंटी को अपनी आगोश में ले लेगा।
पिछले 11 सालों में चौथी बार सही समय पर पहुंचे बदरा, जानें कैसा रहेगा इस साल बारिश का कोटा
झारखंड में मॉनसून के आगमन की सामान्य और प्रामाणिक तिथि 10 से 12 जून के बीच मानी जाती है। इस लिहाज से साल 2026 में मॉनसून का आगमन बिल्कुल सटीक और समय पर हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2015 से 2026 के बीच यह चौथी बार है जब मॉनसून अपनी सामान्य अवधि के भीतर आया है, जबकि दो बार यह 21 जून और एक बार 25 जून को आया था। मौसम विभाग के नियमों के अनुसार, मानसूनी बारिश में 20 फीसदी तक की कमी को सामान्य श्रेणी में रखा जाता है। पिछले कुछ सालों का रिकॉर्ड देखें तो साल 2018, 2020, 2022 और 2023 में झारखंड में मॉनसून काफी कमजोर रहा था, जिसमें 2023 में सबसे कम सिर्फ 30 फीसदी बारिश हुई थी। हालांकि, पिछले साल 2025 की तरह इस बार भी वैज्ञानिकों ने राज्य में सामान्य और अच्छी बारिश होने की उम्मीद जताई है।
चाकुलिया में रिकॉर्ड 92 मिमी बरसे बदरा, मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने जिलों के लिए जारी किया अलर्ट
राज्य में मॉनसून के प्रवेश करते ही कई इलाकों में प्री-मॉनसून और मानसूनी बारिश का दौर शुरू हो गया है। पिछले 24 घंटों में पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया में रिकॉर्ड 92.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा राजधानी रांची में 40.6 मिमी, पश्चिमी सिंहभूम में 27.6 मिमी और जमशेदपुर के चांडिल में 10.2 मिमी पानी गिरा है। रांची के मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि मॉनसून ने संताल के सभी जिलों समेत राज्य के कुल नौ जिलों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा दी है। अनुकूल परिस्थितियों के चलते अगले तीन दिनों के भीतर इसके पूरे झारखंड में सक्रिय हो जाने की प्रबल संभावना है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी और लोगों को उमस भरी गर्मी से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।
आज इन जिलों में आंधी-तूफान का ऑरेंज और येलो अलर्ट, वज्रपात की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत
मौसम विभाग ने शनिवार को संताल परगना के दुमका, जामताड़ा, देवघर, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज के साथ-साथ गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ जिलों में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। वहीं राजधानी रांची समेत शेष 14 जिलों (हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसांवा और खूंटी) के लिए 'येलो अलर्ट' जारी कर लोगों को सावधान रहने को कहा है। इस बीच, मौसम के बदले मिजाज के साथ ही रांची के तमाड़ स्थित दुवारसीनी से एक दर्दनाक खबर आई है, जहां बोरिंग मशीन चला रहे छत्तीसगढ़ निवासी 45 वर्षीय कैलाश नाग की अचानक भीषण आकाशीय बिजली (ठनका) की चपेट में आने से घटनास्थल पर ही मौत हो गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान वे पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।