झारखंड में स्वास्थ्य क्रांति, 30 हजार से बढ़कर....लाख हुआ फ्री इलाज का सुरक्षा कवच
झारखंड में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा पिछले करीब एक दशक में तेजी से बढ़ा है। कभी सालाना 30 हजार रुपये के सीमित स्वास्थ्य बीमा कवर से शुरू हुई व्यवस्था अब 15 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य लाभ तक पहुंच गई है। इस बदलाव में केंद्र की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राज्य की मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना की बड़ी भूमिका रही है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2026-27 में अब तक दोनों योजनाओं के तहत करीब 9.50 लाख लाभार्थियों का इलाज हुआ है। इन उपचारों पर लगभग 1,505 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 3.70 लाख लोगों के इलाज पर 560 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025-26 में उपचार कराने वालों की संख्या लगभग 3.80 लाख रही और खर्च करीब 670 करोड़ रुपये रहा। वहीं 2026-27 में अब तक लगभग 2 लाख लाभार्थियों का इलाज हो चुका है और करीब 275 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
30 हजार से 15 लाख रुपये तक पहुंचा स्वास्थ्य कवर
झारखंड में स्वास्थ्य बीमा की मौजूदा व्यवस्था से पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब परिवारों को सालाना 30 हजार रुपये तक का कवर मिलता था। वर्ष 2015-16 में राज्य में 16.82 लाख से अधिक सक्रिय आरएसबीवाई कार्ड थे और 13,686 अस्पताल भर्ती दर्ज हुई थीं।
वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को मंजूरी दी। इसके बाद सितंबर 2018 में आयुष्मान भारत योजना लागू होने से प्रति परिवार सालाना पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य कवर की व्यवस्था हुई। सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा ने इस मॉडल का दायरा और बढ़ाया।
अबुआ योजना से अतिरिक्त परिवार जुड़े
झारखंड सरकार ने उन गरीब और वंचित परिवारों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना शुरू की, जो केंद्र की पात्रता सूची में शामिल नहीं थे। इस योजना के तहत करीब 35 लाख परिवारों को कवर करने की व्यवस्था है और इसका खर्च राज्य सरकार वहन करती है।
बाद में राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये तक कर दी गई। इससे कैंसर, हृदय रोग, किडनी की बीमारी और गंभीर सर्जरी जैसे महंगे इलाज में परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने का रास्ता बना है।
अस्पतालों का नेटवर्क भी हुआ विस्तृत
स्वास्थ्य सुरक्षा का असर केवल कार्ड और बीमा राशि तक सीमित नहीं है। इलाज उपलब्ध कराने के लिए अस्पतालों का नेटवर्क भी जरूरी है। जनवरी 2022 तक झारखंड में 837 अस्पताल सूचीबद्ध थे। वहीं वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार पीएमजेएवाई के तहत 550 सूचीबद्ध अस्पतालों के माध्यम से 19.34 लाख मरीज लाभान्वित हुए और संचयी संवितरण 2,553 करोड़ रुपये तक पहुंचा।
अब अगली चुनौती राज्य में ही बेहतर इलाज
स्वास्थ्य सुरक्षा का विस्तार होने के बाद अब बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण और समय पर इलाज उपलब्ध कराना है। गंभीर बीमारी के लिए मरीजों को दूसरे राज्यों या बड़े शहरों में जाने की जरूरत न पड़े, इसके लिए मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, विशेषज्ञ डॉक्टरों, जांच सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों को मजबूत करना जरूरी होगा।
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह के अनुसार गंभीर और जटिल बीमारियों का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी मानव संसाधन मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। बीते दस वर्षों की तस्वीर देखें तो झारखंड में स्वास्थ्य सुरक्षा 30 हजार रुपये के शुरुआती कवर से बढ़कर 15 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है और लाखों लाभार्थी इन योजनाओं के तहत उपचार प्राप्त कर चुके हैं।