जर्मनी में पढ़ाई का सपना? जानें भारतीय छात्रों के लिए कौन से एंट्रेंस टेस्ट हैं सबसे जरूरी

जर्मनी में पढ़ाई का सपना? जानें भारतीय छात्रों के लिए कौन से एंट्रेंस टेस्ट हैं सबसे जरूरी

जर्मनी में पढ़ाई का सपना? जानें भारतीय छात्रों के लिए कौन से एंट्रेंस टेस्ट हैं सबसे जरूरी

अगर आप भी दुनिया के बेहतरीन एजुकेशन हब माने जाने वाले जर्मनी से अपनी हायर डिग्री पूरी करने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है। हर साल हजारों भारतीय छात्र उच्च शिक्षा के लिए जर्मनी का रुख करते हैं। यहां की सरकारी यूनिवर्सिटीज में ट्यूशन फीस न के बराबर होने और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यह देश ग्लोबल स्टूडेंट्स की पहली पसंद बना हुआ है। हालांकि, जर्मनी के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में दाखिला लेने से पहले आपको कुछ बेहद जरूरी एंट्रेंस टेस्ट और एग्जाम पास करने होते हैं, जिनके बिना वहां की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन पाना नामुमकिन है। आइए जानते हैं कि एक भारतीय छात्र के तौर पर आपको किन परीक्षाओं की तैयारी पहले से करके रखनी होगी।

भाषा की बाधा दूर करने वाले जरूरी इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट

जर्मनी में अधिकांश इंटरनेशनल और पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्स इंग्लिश मीडियम में पढ़ाए जाते हैं। ऐसे में आपको यह साबित करना होता है कि आप अंग्रेजी भाषा को अच्छी तरह समझ और बोल सकते हैं। इसके लिए भारतीय छात्रों को मुख्य रूप से दो टेस्ट देने होते हैं। पहला है आईईएलटीएस (IELTS) और दूसरा है टॉफेल (TOEFL)। यूनिवर्सिटी और आपके चुने गए कोर्स के आधार पर इनका मिनिमम स्कोर तय होता है। आमतौर पर आईईएलटीएस में 6.5 या उससे ज्यादा का बैंड स्कोर और टॉफेल में 80 से 90 का स्कोर सुरक्षित माना जाता है। अगर आपका यह स्कोर अच्छा है, तो आपके एडमिशन की राह काफी आसान हो जाती है।

जर्मन भाषा में पकड़ मजबूत करने के लिए लैंग्वेज एग्जाम

भले ही आपका कोर्स अंग्रेजी में हो, लेकिन जर्मनी में रोजमर्रा की जिंदगी बिताने और पार्ट-टाइम जॉब खोजने के लिए जर्मन भाषा आना एक बड़ा प्लस पॉइंट माना जाता है। अगर आप किसी ऐसे कोर्स में दाखिला ले रहे हैं जो पूरी तरह या आंशिक रूप से जर्मन भाषा में है, तो आपको टेस्टडैफ (TestDaF) या डीएसएच (DSH) जैसी परीक्षाएं पास करनी होंगी। इन परीक्षाओं में आपकी जर्मन भाषा लिखने, पढ़ने, सुनने और बोलने की क्षमता को आंका जाता है। जर्मन भाषा की समझ रखने वाले छात्रों को वहां की यूनिवर्सिटीज में प्राथमिकता भी दी जाती है।

मास्टर्स और रिसर्च प्रोग्राम्स के लिए जीआरई और जीमैट स्कोर

अगर आप जर्मनी के टॉप बिजनेस स्कूलों या टेक्निकल यूनिवर्सिटीज (TU9) से मैनेजमेंट या इंजीनियरिंग में मास्टर्स (M.Sc या MBA) करना चाहते हैं, तो आपको जीआरई (GRE) या जीमैट (GMAT) की परीक्षा देनी पड़ सकती है। हालांकि सभी जर्मन यूनिवर्सिटीज में यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन फाइनेंस, इकोनॉमिक्स और कोर इंजीनियरिंग से जुड़े कई प्रीमियम कोर्सेज में एडमिशन के लिए एक अच्छा जीआरई या जीमैट स्कोर आपकी प्रोफाइल को बाकी आवेदकों से काफी मजबूत बना देता है।

एकेडमिक योग्यता परखने के लिए टेस्टएएस परीक्षा

अंडरग्रेजुएट (बैचलर) कोर्सेज में एडमिशन लेने वाले नॉन-यूरोपियन छात्रों के लिए टेस्टएएस (TestAS) एक बेहद महत्वपूर्ण सेंट्रल स्टैंडर्डाइज्ड टेस्ट है। यह परीक्षा छात्र की एकेडमिक क्षमताओं और सूझबूझ को जांचने के लिए ली जाती है। यह टेस्ट दो हिस्सों में होता है — कोर टेस्ट और सब्जेक्ट-स्पेसिफिक मॉड्यूल (जैसे इंजीनियरिंग, इकोनॉमिक्स या ह्यूमेनिटीज)। कई जर्मन यूनिवर्सिटीज अपने सिलेक्शन प्रोसेस में टेस्टएएस स्कोर को काफी महत्व देती हैं, इसलिए बैचलर्स के लिए जाने वाले छात्रों को इसकी तैयारी जरूर करनी चाहिए।

वीसा और वेरिफिकेशन के लिए सबसे जरूरी एपीएस सर्टिफिकेट

इन सभी परीक्षाओं के अलावा, भारतीय छात्रों के लिए जो सबसे जरूरी दस्तावेज बन चुका है, वह है एपीएस (APS - Akademische Prüfstelle) सर्टिफिकेट। जर्मन दूतावास ने भारत से जाने वाले छात्रों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत आपके सभी भारतीय एकेडमिक डॉक्यूमेंट्स और डिग्रियों की प्रामाणिकता की जांच की जाती है। जब तक आपके पास एपीएस सर्टिफिकेट नहीं होगा, तब तक आप न तो जर्मन वीसा के लिए अप्लाई कर पाएंगे और न ही अधिकांश यूनिवर्सिटीज में फाइनल एडमिशन ले पाएंगे। इसलिए अपनी प्लानिंग में एपीएस वेरिफिकेशन के समय को जरूर शामिल करें।

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