US और UK जैसे देशों में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र ऐसे रहें पूरी तरह अलर्ट
विदेशों की चमक-दमक भरी दुनिया में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना लेकर हर साल लाखों भारतीय छात्र अमेरिका (US), ब्रिटेन (UK), कनाडा और यूरोप जैसे विकसित देशों का रुख करते हैं। इन छात्रों का मुख्य सपना यही होता है कि वे अपनी डिग्री पूरी करने के बाद किसी बेहतरीन कंपनी में नौकरी पाकर वहां परमानेंट सेटल हो जाएं या कम से कम कुछ साल काम करके अपने विदेशी कर्ज को चुका सकें। हालांकि, इस सुनहरे सपने के पीछे एक बहुत बड़ा और खतरनाक जाल बिछा हुआ है, जिसके बारे में अधिकांश छात्रों को शुरुआती दौर में कोई जानकारी नहीं होती है। वर्तमान समय में विदेशी धरती पर 'जॉब-स्पॉन्सरशिप' (Job Sponsorship) और वीजा एक्सटेंशन के नाम पर ठगों और फर्जी एजेंटों द्वारा भारतीय छात्रों को बुरी तरह लूटा जा रहा है। जैसे ही छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करके वर्क वीजा या परमानेंट रेजिडेंसी (PR) की प्रक्रिया में होते हैं, वैसे ही कई जालसाज गिरोह सक्रिय हो जाते हैं और उन्हें फर्जी स्पॉन्सरशिप का झांसा देकर लाखों रुपए ऐंठ लेते हैं। आइए इस विशेष अंतरराष्ट्रीय और प्रवासी छात्र सुरक्षा रिपोर्ट में गहराई से जानते हैं कि इस फ्रॉड की पूरी इनसाइड स्टोरी क्या है और विदेशों में पढ़ रहे हमारे युवा इस खतरनाक जाल से खुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
क्या है जॉब-स्पॉन्सरशिप फ्रॉड और कैसे विदेशों में छात्रों को बनाया जाता है आसान शिकार?
विदेशी श्रम कानूनों के नियमों के अनुसार, जब कोई अंतरराष्ट्रीय छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर लेता है, तो उसे वहां कानूनी रूप से काम करने के लिए किसी अधिकृत और रजिस्टर्ड कंपनी से एम्प्लॉयमेंट वीजा स्पॉन्सरशिप की आवश्यकता होती है। अमेरिका में H-1B वीजा या यूके में स्किल्ड वर्कर वीजा हासिल करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया है, जिसके लिए कंपनियों को कानूनी मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। ठगों और फर्जी कंसल्टेंसी चलाने वाले गिरोहों को छात्रों की इसी मजबूरी और वीजा समाप्त होने के डर का पूरा अंदाजा होता है। वे सोशल मीडिया, लिंक्डइन (LinkedIn) या फर्जी ईमेल के माध्यम से छात्रों से संपर्क करते हैं और यह दावा करते हैं कि वे किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में उनके लिए तुरंत जॉब-स्पॉन्सरशिप और वीजा अप्रूवल का प्रबंध करवा सकते हैं। छात्र जब उनकी इस चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसकर प्रोसेसिंग फीस, लीगल चार्जेस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर अपनी जमा-पूंजी इन जालसाजों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, तो वे अचानक गायब हो जाते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब जाता है।
US और UK जैसे देशों में बढ़ रहे हैं मामले, क्या कहते हैं इमिग्रेशन विशेषज्ञों के आंकड़े?
हाल के वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से भारतीय छात्रों के साथ होने वाले वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थानीय पुलिस और भारतीय दूतावासों (Indian Embassies) के पास हर महीने ऐसे दर्जनों मामले पहुंच रहे हैं जहां छात्रों ने अपनी जिंदगीभर की गाढ़ी कमाई या पार्ट-टाइम जॉब से बचाए गए पैसे इन फर्जी जॉब ऑफर के चक्कर में गंवा दिए हैं। कई बार तो स्थिति इतनी भयानक हो जाती है कि छात्र कानूनी कार्रवाई के डर से या अपने परिवार को बताने में शर्म महसूस करते हुए इस मानसिक प्रताड़ना को चुपचाप सहते रहते हैं। इमिग्रेशन विशेषज्ञों का यह कहना है कि कोई भी वास्तविक और प्रतिष्ठित कंपनी कभी भी जॉब इंटरव्यू या वीजा स्पॉन्सरशिप देने के एवज में शुरुआती दौर में छात्र से नगद या अनौपचारिक माध्यम से पैसे की मांग नहीं करती है। यदि कोई कंपनी या एजेंट आपको नौकरी के बदले पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है, तो वह सौ प्रतिशत एक फ्रॉड गिरोह का सदस्य है और आपको तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
फर्जी जॉब ऑफर्स को पहचानने के अचूक तरीके और भारतीय छात्रों के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय
विदेशों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को अपनी सुरक्षा खुद सुनिश्चित करनी होगी और किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंसी पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचना होगा। सबसे पहले यह जांच लें कि जिस कंपनी से आपको जॉब ऑफर मिल रहा है, वह उस देश के श्रम विभाग या सरकार के इमिग्रेशन पोर्टल पर आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड है या नहीं। लिंक्डइन पर मिलने वाले मैसेजों या अज्ञात रिक्रूटर्स की प्रोफाइल की गहराई से छानबीन करें, क्योंकि कई बार धोखेबाज असली कंपनियों के नाम पर फेक डोमेन और फर्जी ईमेल आईडी बनाकर छात्रों को चकमा देते हैं। अपने विश्वविद्यालय के करियर सेल (University Career Services) या कानूनी सलाहकारों से हमेशा विचार-विमर्श करें, क्योंकि उनके पास स्थानीय बाजार की सही और पुख्ता जानकारी होती है। किसी भी अनुबंध (Contract) पर हस्ताक्षर करने से पहले उसके हर एक नियम को ध्यान से पढ़ें और यदि संभव हो तो किसी स्थानीय लाइसेंस प्राप्त इमिग्रेशन वकील से उसकी समीक्षा जरूर करवाएं।
भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी, संकट के समय कहां करें संपर्क?
विदेशी धरती पर इस तरह के बढ़ते अपराधों को देखते हुए अमेरिका और ब्रिटेन में स्थित भारतीय दूतावासों तथा महावाणिज्य दूतावासों द्वारा लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है। छात्रों से यह बार-बार अपील की जा रही है कि वे अपनी व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी, पासपोर्ट डिटेल्स या बैंक खाते की जानकारी किसी भी अपरिचित प्लेटफॉर्म पर साझा न करें। यदि दुर्भाग्यवश कोई छात्र इस प्रकार के किसी फ्रॉड का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत स्थानीय पुलिस (Local Law Enforcement) के साथ-साथ अपने नजदीकी भारतीय दूतावास के आपातकालीन हेल्पडेस्क से संपर्क करना चाहिए। विदेश जाने का सपना तभी सार्थक हो सकता है जब आप पूरी तरह से जागरूक, सतर्क और कानूनी रूप से मजबूत हों। थोड़ी सी सावधानी और सूझबूझ आपको न केवल इस बड़े वित्तीय चूने से बचा सकती है, बल्कि आपके विदेशी करियर को एक सुरक्षित और उज्ज्वल दिशा भी दे सकती है।