न सुविधाएं मिलीं, न इंटरनेट का सहारा… फिर भी हार नहीं मानीं, डॉक्टर बनने निकलीं बहनें
जिंदगी में अगर पक्का इरादा और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो बड़े से बड़ा पहाड़ जैसी मुसीबत भी बौनी साबित हो जाती है। ओडिशा के एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से ताल्लुक रखने वाली दो सगी बहनों ने तमाम तरह की बुनियादी सुविधाओं के अभाव को मात देते हुए नीट यूजी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर एक मिसाल कायम की है।
मयूरभंज जिले की इन दोनों होनहार बेटियों की संघर्ष गाथा उन तमाम छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का एक ऐसा स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों या असफलता से घबराकर जल्दी हिम्मत हार जाते हैं।
महंगी कोचिंग का पैसा नहीं, घर में मोबाइल नेटवर्क तक नहीं था उपलब्ध
ओडिशा के कप्टिपदा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले महुलपंख गांव की रहने वाली यज्ञसेनी और दिव्यासेनी के लिए डॉक्टर बनने का यह सफर कतई आसान नहीं था। परिवार की माली हालत ऐसी बिल्कुल नहीं थी कि वे किसी बड़े शहर जाकर लाखों रुपये की महंगी कोचिंग संस्थानों की फीस भर सकें।
ऐसे में दोनों ने हार मानने के बजाय ऑनलाइन माध्यमों और खुद की मेहनत पर भरोसा किया। लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि उनके घर पर मोबाइल नेटवर्क की बहुत बुरी समस्या थी, जिसके कारण ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान इंटरनेट बार-बार ठप हो जाता था और उनकी पढ़ाई में रुकावटें आती थीं।
जंगल और पहाड़ी की चोटी को बना लिया अपना स्टडी रूम
मुश्किलें चाहे जितनी भी बड़ी हों, अगर हौसले बुलंद हों तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं। नेटवर्क की इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए इन दोनों बहनों ने एक अनोखा और संघर्ष भरा रास्ता चुना। जब भी घर के भीतर सिग्नल नहीं मिलते थे, वे घर के पास स्थित एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर चली जाती थीं जहाँ मोबाइल के सिग्नल आसानी से मिल जाते थे। वही वीरान पहाड़ी और जंगल का खुला माहौल ही उनका क्लासरूम और स्टडी रूम बन गया। वे घंटों वहां बैठकर अपनी ऑनलाइन क्लासेज अटेंड करती थीं और पूरी शिद्दत से पढ़ाई में जुटी रहती थीं।
किसान पिता और आंगनवाड़ी मां के अटूट भरोसे ने दिलाई सफलता
इन दोनों बेटियों के पिता गौरंगा खटुआ खेती-किसानी करते हैं, जबकि उनकी मां सुनीता एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में अपनी सेवाएं देती हैं। बेहद सीमित आमदनी में पूरे घर का खर्च चलाना और साथ ही दोनों बच्चों की पढ़ाई का भारी-भरकम खर्च उठाना माता-पिता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी तरफ से बेटियों की पढ़ाई में कोई आंच नहीं आने दी और हर कदम पर उनका साथ निभाया। कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई, जहां बड़ी बहन यज्ञसेनी ने अपने तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की, वहीं छोटी बहन दिव्यासेनी ने अपने पहले ही प्रयास में नीट परीक्षा पास करके परिवार का नाम रोशन कर दिया।