Up kiran,Digital Desk : सोचिए, आपको कोर्ट में कोई ज़रूरी काम हो, कोई तारीख हो, या ज़मीन की रजिस्ट्री करानी हो, और आप वहाँ पहुँचें तो पता चले कि काम नहीं होगा। आज भी नहीं, कल भी नहीं... और ऐसा पिछले 20 दिनों से चल रहा है। देहरादून में आजकल कुछ यही हाल है।
शहर के वकील आज 21वें दिन भी हड़ताल पर हैं, और इस वजह से कचहरी और रजिस्ट्रार ऑफिस, दोनों जगहों पर काम पूरी तरह से ठप पड़ा है। वकील अपनी मांगों को लेकर कोर्ट के बाहर हरिद्वार रोड पर धरने पर बैठे हैं और उन्होंने सांकेतिक चक्का जाम भी जारी रखने का फैसला किया है।
आखिर वकील चाहते क्या हैं?
- वकीलों के बैठने के लिए जगह (चेंबर) चाहिए।
- सरकार ये चेंबर बनवाने में मदद करे।
वकीलों का कहना वे लंबे समय से सरकार से इस बारे में बात कर रहे हैं, चिट्ठियां लिख रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरकार की तरफ से कोई ठोस भरोसा न मिलने के कारण ही उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। शनिवार को उन्होंने अपनी बात पहुंचाने के लिए घंटाघर तक एक मार्च भी निकाला था, लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी।
"अब यह हमारी मजबूरी है"
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल का कहना है, "जब कोई सुनने को तैयार नहीं है, तो हमारे पास हड़ताल जारी रखने के अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा है। यह अब हमारी मजबूरी बन गई है।"
इस हड़ताल का सबसे ज़्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। जिनके मुकदमे चल रहे हैं, उन्हें अगली तारीख का इंतज़ार करना पड़ रहा है। जिन्हें ज़मीन या मकान की रजिस्ट्री करानी है, उनके काम रुके पड़े हैं। शहर में न्याय का पहिया पूरी तरह से थम गया है और कोई नहीं जानता कि यह हड़ताल और कितने दिन चलेगी।
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