Mahatma Gandhi Birthday: गांधीजी का जीवन ही संदेश है- प्रो दाधीच

गांधी जी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे लेकिन 19 वर्ष तक कोई अख़बार ही नही देखा, पहली बार इंग्लैंड में अख़बार पढा और उसी में उनके 9 आलेख प्रकाशित हुये जो शाकाहार और भारतीय संस्कृति आधारित थे।

अजमेर, 03 अक्टूबर। वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा (Vardhman Mahaveer Open University Kota) के पूर्व कुलपति प्रोफेसर नरेश दाधीच ने कहा कि गांधीजी (Mahatma Gandhi Birthday) के साथ स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े सभी संभ्रांत परिवार से थे लेकिन गांधी जी का संप्रेषण इतना प्रभावी होता था कि देश की जनता उनकी कही गई बात पर पूर्ण विश्वास करती थी और मानती थी की गांधी जो कह रहे हैं वो आमजन व राष्ट्र हित में है न कि किसी के व्यक्तिगत हेतु।

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प्रो दाधीच राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी (Mahatma Gandhi Birthday) की 151वी जयंती के अवसर पर विश्वविद्यालय के कप्तान दुर्गा प्रसाद चौधरी पत्रकारिता जनसंचार एवं मल्टीमीडिया तकनीकी विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय ऑनलाइन संवाद (वेबिनार) के मुख्यवक्ता के रूप में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि इस बात को नेहरू जी ने भी स्वीकार किया था और कहा था की कांग्रेस नेताओं द्वारा कही गई बात पर लोगों को शंका रहती थी। गांधीजी (Mahatma Gandhi Birthday) को जब कोई संदेश देने को कहा जाता था तो वो कहते थे मेरा जीवन ही मेरा सन्देश है। गांधीजी (Mahatma Gandhi Birthday) अपने भाषणों में किसी एक राष्ट्र, धर्म या जाति के लिए नहीं वरण संपूर्ण मानवता के लिए आत्मीय संप्रेषण करते थे इसीलिए विश्व उन्हें गंभीरता से सुनता और मानता था। विशिष्ट व्याख्यान प्रदान करते हुए प्राचार्य, श्रमजीवी महाविद्यालय डॉ. अनंत भटनागर ने कहा की गांधीजी लेखन और पत्रकारिता और प्रभावी संप्रेषण के कारण विश्वव्यापी नेता बने।

गांधी जी (Mahatma Gandhi Birthday) स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे लेकिन 19 वर्ष तक कोई अख़बार ही नही देखा, पहली बार इंग्लैंड में अख़बार पढा और उसी में उनके 9 आलेख प्रकाशित हुये जो शाकाहार और भारतीय संस्कृति आधारित थे। गांधी जी द्वारा निरन्तर संवाद के कारण लोगों से रिश्ता बढ़ता गया। वे अख़बारों की कमियों के लिये भी संपादक को टोकने से चूकते नहीं थे।

गांधीजी (Mahatma Gandhi Birthday) अखबार को जनचेतना जागृत करने का सशक्त माध्यम मानते थे इसीलिए उन्होंने सामुदायिक पत्रिका भारतीय ओपिनियन का प्रकाशन प्रारंभ किया लेकिन उसमें किसी भी प्रकार का विज्ञापन प्रकाशित नहीं करने व केवल पंजीकृत सदस्यों को ही उसका वितरण किया गया, क्योंकि उनका मानना था की विज्ञापन से सत्य प्रकाशन में मानसिक दबाव बन जाता है, यह भी कहा कि भारतीय ओपिनियन मेरी आत्मा का दर्पण है गांधी जी (Mahatma Gandhi Birthday) ने कभी भी अपने आदर्श, सत्य अहिंसा का त्याग नहीं किया। गांधी जी (Mahatma Gandhi Birthday) का मानना था की संपादक को धैर्यवान, विन्रम, सत्यवान व मृदुभाषी होना चाहिये। लेकिन पक्षकारी व दुराग्रही नहीं होना चाहिए।

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