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Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश भाजपा में पंकज चौधरी की नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के बाद, अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंत्रिमंडल में कई नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं और कुछ पुराने मंत्रियों को हटाने का भी विचार किया जा रहा है। यह बदलाव राज्य की राजनीति में एक नई दिशा दिखाने के संकेत दे रहे हैं, जो आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कोर कमिटी की बैठक: मंत्रिमंडल में बदलाव पर मंथन

हाल ही में, मंगलवार को हुई भाजपा की कोर कमिटी की बैठक में इस विषय पर गहरी चर्चा की गई। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। यह बैठक संघ, संगठन और सरकार के बीच पहली बार एक साथ हुई, जिसमें एक-दूसरे के कार्यों और दृष्टिकोणों पर विचार-विमर्श किया गया।

भूपेंद्र चौधरी की वापसी की संभावना

सूत्रों के अनुसार, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की मंत्रिमंडल में वापसी को लेकर गंभीरता से विचार हो रहा है। इसके साथ ही, लगभग छह और विधायकों को मंत्री बनाए जाने का प्रस्ताव भी चर्चा में है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के संदर्भ में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किए जा सकते हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख

फिलहाल, योगी सरकार में 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं, यानी छह नए मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार के लिए दिल्ली से मंजूरी मिलने के बाद जनवरी या फरवरी 2026 में यह निर्णय लिया जा सकता है। खरमास समाप्त होने के बाद, शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। यह बदलाव भाजपा के मिशन-2027 के तहत महत्वपूर्ण होगा।

कौन हो सकते हैं नए मंत्री?

सूत्रों के मुताबिक, मकर संक्रांति के बाद मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इसमें कुछ मंत्रियों के विभाग बदलने की भी संभावना है और साथ ही कुछ नए चेहरे भी शामिल हो सकते हैं। जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें भूपेंद्र चौधरी, अशोक कटारिया, प्रतीक भूषण सिंह, मनोज पांडेय और पूजा पाल शामिल हैं। यह बदलाव उन क्षेत्रों और जातियों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने के लिए किया जा सकता है, जो आगामी चुनावों में भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।