Up kiran,Digital Desk : दिल्ली नगर निगम (MCD) ने अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट पेश कर दिया है। दिल्ली वालों के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि एमसीडी कमिश्नर अश्वनी कुमार ने न तो कोई नया टैक्स लगाया और न ही किसी मौजूदा टैक्स या शुल्क में कोई बढ़ोतरी की है। कमिश्नर ने साफ किया कि इस साल एमसीडी की तीन सबसे बड़ी प्राथमिकताएं होंगी - सफाई व्यवस्था में सुधार, वायु प्रदूषण पर लगाम, और स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाना।
लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि जिन विभागों पर इन प्राथमिकताओं को पूरा करने की जिम्मेदारी है, उनका बजट ही घटा दिया गया है, जिससे इन दावों के हकीकत में बदलने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जिन वादों पर जोर, उन्हीं का बजट घटाया
एमसीडी कमिश्नर ने सफाई और वायु प्रदूषण को सबसे बड़ी चुनौती तो माना, लेकिन इन दोनों से जुड़े विभागों के बजट पर कैंची चला दी:
- सफाई विभाग: इसका बजट पिछले साल के 4881 करोड़ रुपये से घटाकर 4795 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- उद्यान विभाग: हरियाली बढ़ाकर प्रदूषण कम करने वाले इस विभाग के बजट में भी 6 करोड़ की कमी की गई इसका बजट 403 करोड़ से घटाकर 397 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
- इंजीनियरिंग विभाग: सड़कों और नालियों की देखरेख करने वाले इस विभाग के बजट में भी करीब 160 करोड़ रुपये की बड़ी कटौती की गई है।
हालांकि, कमिश्नर ने दावा किया कि विभागों की कार्यक्षमता बढ़ाकर कम बजट में ही ज्यादा और बेहतर काम किया जाएगा।
शिक्षा पर मेहरबान हुई एमसीडी, बजट में भारी बढ़ोतरी
एक तरफ जहां कटौती हुई, वहीं दूसरी ओर एमसीडी ने शिक्षा विभाग पर जमकर पैसा लुटाया है। स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के वादे को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग का बजट अगले साल के लिए 2520 करोड़ रुपये तय किया गया है, जो पिछले बजट के मुकाबले लगभग 1200 करोड़ रुपये ज्यादा है।
बजट पेश होते ही छिड़ा विवाद: स्थायी समिति और कमिश्नर आमने-सामने
बजट पेश होने के साथ ही एमसीडी में अधिकारियों और निर्वाचित नेताओं के बीच का टकराव खुलकर सामने आ गया। स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि वे लगातार समिति को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बजट में जिन उपलब्धियों का जिक्र किया गया है, उनके प्रस्ताव कभी समिति के सामने लाए ही नहीं गए और उन्हें सीधे सदन में पेश कर दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने अपने दफ्तर से OSD हटाए जाने पर भी नाराजगी जताई, जिससे समिति का कामकाज ठप पड़ गया है।
MCD की भविष्य की बड़ी योजनाएं
- कूड़े से बिजली: नरेला-बवाना में 3000 टन क्षमता वाला नया वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगेगा। गाजीपुर में भी 2000 टन क्षमता का प्लांट और ओखला प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।
- जीरो-वेस्ट कॉलोनियां: 51 नई कॉलोनियां विकसित की गई हैं, जहां कूड़ा बाहर नहीं जाता। इनकी संख्या और बढ़ाई जाएगी।
- लैंडफिल खत्म करने की कवायद: भलस्वा, ओखला और गाजीपुर के कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के लिए बायो-माइनिंग का काम और तेज किया जाएगा।
- मशीनों से सफाई: सड़कों और नालों की सफाई के लिए 14 नई मैकेनिकल रोड स्वीपर मशीनें खरीदी जाएंगी।
- ड्रोन से सर्वे: अवैध निर्माण, हाउस टैक्स चोरी और अतिक्रमण पर नजर रखने के लिए ड्रोन सर्वे का काम पूरा किया जाएगा।
- लाइसेंस सिस्टम होगा आसान: अब जनरल ट्रेड लाइसेंस को प्रॉपर्टी टैक्स से जोड़ा जाएगा, जिससे अलग से आवेदन करने का झंझट खत्म हो जाएगा।
- राजस्व बढ़ेगा: नई पार्किंग और विज्ञापनों के लिए नए यूनिपोल लगाकर एमसीडी अपनी कमाई बढ़ाएगी
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