देश के इन 30 प्रमुख रास्तों पर होने जा रहा है एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव, जानकर झूम उठेंगे आप

देश के इन 30 प्रमुख रास्तों पर होने जा रहा है एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव, जानकर झूम उठेंगे आप

भारत के बुनियादी ढांचे और सड़क परिवहन के क्षेत्र में इन दिनों एक बहुत ही क्रांतिकारी और जनहितैषी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है, जिसने आम नागरिकों और खासकर पैदल चलने वाले राहगीरों के चेहरों पर खुशी ला दी है। आए दिन देश के महानगरों और एक्सप्रेसवे जैसी आधुनिक सड़कों पर तेज रफ्तार गाड़ियों के बीच पैदल चलना एक जानलेवा जोखिम भरा काम माना जाता रहा है, क्योंकि अधिकांश हाईवे और मुख्य मार्ग केवल वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर ही डिजाइन किए जाते रहे हैं। लेकिन अब शहरी नियोजन और सड़क सुरक्षा को एक बिल्कुल नया आयाम देने के लिए सरकार ने देश भर के चुनिंदा 30 प्रमुख और व्यस्त रास्तों पर एक मेगा प्रोजेक्ट शुरू करने का फैसला किया है। इस विशेष पहल के तहत अब इन हाईवे जैसी शानदार सड़कों पर पैदल चलने वाले यात्रियों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए ऐसी अभूतपूर्व सुविधाएं विकसित की जाएंगी, जिन्हें देखकर आपकी आंखें फटी रह जाएंगी। इस शानदार बदलाव के धरातल पर उतरने के बाद सड़क हादसों में भारी कमी आएगी और पैदल यात्रा करने वालों के दिन वाकई में फिर जाएंगे। आइए इस पूरे मेगा प्रोजेक्ट, चयनित 30 रास्तों और मिलने वाली आधुनिक सुविधाओं के हर एक पहलू को विस्तार से समझते हैं।

क्या है सरकार का यह नया मास्टरप्लान और क्यों पड़ी हाईवे जैसी सड़कों पर पैदलों की सुध लेने की जरूरत?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय तथा नगर नियोजन विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए इस नए मास्टरप्लान के पीछे का मुख्य उद्देश्य देश के बुनियादी ढांचे को अधिक 'इंसान-केंद्रित' (Human-Centric) बनाना है। अब तक की व्यवस्था यह रही है कि जैसे ही कोई सड़क एक्सप्रेसवे या हाईवे का रूप लेती है, वहां से पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और स्थानीय राहगीरों के लिए सुरक्षित रास्ते धीरे-धीरे गायब होने लगते हैं या फिर उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर हाईवे पार करना पड़ता है। सड़क सुरक्षा आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए, तो हर साल देश में तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से सबसे ज्यादा जान गंवाने वाले लोग पैदल यात्री ही होते हैं। इसी गंभीर समस्या का स्थाई समाधान निकालने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर देश के सबसे व्यस्त और दुर्घटना-संभावित 30 प्रमुख रास्तों और कॉरिडोर्स की पहचान की है, जहां इस विशेष सुरक्षा और सुगमता अभियान को युद्ध स्तर पर लागू किया जाने वाला है।

वे 30 प्रमुख रास्ते कौन से हैं और इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत क्या-क्या बदलाव किए जाएंगे?

चयनित किए गए इन 30 महत्वपूर्ण रास्तों और राजमार्गों में देश के विभिन्न राज्यों के प्रमुख एक्सप्रेसवे लिंक, मेट्रोपॉलिटन शहरों को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के व्यस्त मार्ग विशेष रूप से शामिल हैं। इन 30 रास्तों पर होने वाले इस बड़े काम के तहत सड़क के दोनों किनारों पर चौड़े, आधुनिक और सुंदर फुटपाथों (Pedestrian Walkways) का निर्माण किया जाएगा, जिन पर टाइल्स लगाने के साथ-साथ विशेष रूप से देख न पाने वाले लोगों के लिए टैक्टाइल टाइल्स भी बिछाई जाएंगी। इसके अलावा, रात के समय इन रास्तों पर रोशनी की कोई कमी न रहे, इसके लिए ऊर्जा-कुशल हाई-मास्ट एलईडी सोलर लाइट्स लगाई जाएंगी, और यात्रियों के लिए जगह-जगह आधुनिक शेड वाले बस स्टॉप और बेंच की व्यवस्था की जाएगी ताकि पैदल चलने वालों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

आधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल: अंडरपास, ओवरब्रिज और स्मार्ट जेब्रा क्रॉसिंग की सौगात

इन 30 रास्तों पर केवल सामान्य फुटपाथ ही नहीं बनाए जाएंगे, बल्कि आधुनिक तकनीकी और इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करके सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। जिन स्थानों पर सड़क पार करना सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है, वहां पर अत्याधुनिक एस्केलेटर और लिफ्ट युक्त पैदल पार पुल (Foot Over Bridges) तथा भूमिगत मार्ग यानी सबवे (Subways) बनाए जाएंगे। इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से लैस स्मार्ट जेब्रा क्रॉसिंग और सेंसर आधारित ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जो पैदल यात्रियों को सड़क पार करते समय स्वतः ही लाल बत्ती के जरिए सुरक्षित समय प्रदान करेंगे। इन सभी आधुनिक सुविधाओं के जुड़ जाने से अब इन एक्सप्रेसवे जैसी सड़कों पर पैदल चलना न केवल आसान हो जाएगा, बल्कि यह पूरी तरह से सुरक्षित और आरामदायक भी बन जाएगा।

आम जनता और पैदल यात्रियों के लिए मील का पत्थर साबित होगा यह बदलाव

सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल देश के सड़क निर्माण इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि आधुनिक विकास का मतलब केवल बड़ी गाड़ियों के लिए रास्ते बनाना नहीं है, बल्कि हर आम नागरिक की जिंदगी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इन 30 रास्तों पर शुरू होने वाले इस बड़े काम से उन लाखों दैनिक यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सबसे बड़ा फायदा पहुंचेगा जो प्रतिदिन इन खतरनाक सड़कों को पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते थे। आने वाले कुछ ही महीनों में जब ये रास्ते अपने नए और सुरक्षित स्वरूप में जनता को समर्पित किए जाएंगे, तो यकीनन देश के बुनियादी ढांचे की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली हुई नजर आएंगी, और पैदल चलने वालों के लिए सड़कों का यह नया सफर वाकई सुकून भरा साबित होगा।