Delhi Hotel Ambassador Case: दिल्ली का मशहूर होटल एंबेसडर पहुंचा हाई कोर्ट, बेदखली नोटिस के बाद बंद होने का खतरा!

Delhi Hotel Ambassador Case: दिल्ली का मशहूर होटल एंबेसडर पहुंचा हाई कोर्ट, बेदखली नोटिस के बाद बंद होने का खतरा!

दिल्ली के पॉश इलाके में स्थित प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक 'होटल एंबेसडर' (Hotel Ambassador) का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट के गलियारों में पहुंच गया है। होटल के मालिकाना हक वाली कंपनी ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' (सार्वजनिक परिसर अधिनियम) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए बेदखली नोटिस के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। यह कानूनी कार्रवाई दशकों पुराने एक मामले में अपीलीय अदालत के उस फैसले के तुरंत बाद हुई है, जिसमें अदालत ने केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने माना था कि मालिक ने सरकारी जमीन (प्रॉपर्टी) पर पब्लिक होटल बनाकर और उसका व्यावसायिक संचालन करके सरकारी ग्रांट (अनुदान) की बुनियादी शर्तों का घोर उल्लंघन किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते तय की गई है।

तीस हजारी कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती

होटल के मालिक, ‘सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड’ ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर तीस हजारी कोर्ट के डिस्ट्रिक्ट जज द्वारा 9 जून को सुनाए गए फैसले को चुनौती दी है। अपीलीय अदालत (डिस्ट्रिक्ट जज) ने अपने फैसले में सीनियर सिविल जज-कम-रेंट कंट्रोलर (सेंट्रल) के साल 2009 के उस पुराने आदेश को पलट दिया है, जिसमें होटल के निर्माण को पूरी तरह कानूनी और वैध माना गया था। केंद्र सरकार ने 2009 के उसी फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

होटल पर मंडराया तुरंत बेदखली का संकट

अदालत के फैसले पर तुरंत रोक (स्टे) लगाने की मांग करते हुए अपीलकर्ता कंपनी के वकील ने दलील दी कि ‘पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट’ के तहत सरकार की ओर से 11 जून को जारी किए गए नोटिस के कारण होटल को तुरंत खाली कराने का खतरा मंडरा रहा है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार के वकीलों ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए साफ किया कि 11 जून को जारी किया गया यह नोटिस पूरी तरह स्वतंत्र है और इसका ट्रायल कोर्ट के वर्तमान फैसले से सीधा कोई लेना-देना नहीं है।

जस्टिस तेजस करिया की अदालत ने जारी किया नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट के जस्टिस तेजस करिया ने अंतरिम राहत की अर्जी पर नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा, “केंद्र सरकार के वकील (CGSC) ने निर्देश मिलने पर यह बयान दिया है कि पब्लिक प्रीमिसेस (PP) एक्ट के तहत आगे की कार्यवाही विवादित फैसले का हवाला दिए बिना या उससे प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से की जाएगी। इस संबंध में दोनों पक्षों के कानूनी अधिकार और तर्क पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।” अदालत ने सरकारी वकील के इस बयान को ऑन-रिकॉर्ड लेते हुए प्रतिवादी विभाग को इसका कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।

क्या है होटल एंबेसडर का दशकों पुराना मुख्य विवाद?

इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ें आजादी के पहले से जुड़ी हुई हैं। केंद्र सरकार के वकील के मुताबिक:

  • 'गवर्नर जनरल इन काउंसिल' और 'सरदार बहादुर सर शोभा सिंह एंड संस लिमिटेड' के बीच 8 अक्टूबर 1945 को एक लीज एग्रीमेंट (पट्टा समझौता) हुआ था, जो ‘गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट’ के तहत एक सरकारी अनुदान की प्रकृति का था।

  • इस लीज एग्रीमेंट में साफ शर्त थी कि कंपनी इस आवंटित जमीन और बिल्डिंग का इस्तेमाल सिर्फ आवासीय इकाइयों (रिहायशी यूनिट) के निर्माण के लिए करेगी।

  • कंपनी ने इस करार का सीधा उल्लंघन करते हुए वहां एक बड़ा कमर्शियल पब्लिक होटल (होटल एंबेसडर) खड़ा कर दिया और उसका संचालन शुरू कर दिया।

  • सरकार ने 24 फरवरी 1959 को शर्तों के इस उल्लंघन को ठीक करने के लिए कंपनी को एक लिखित नोटिस भी दिया था, लेकिन कंपनी इसे सुधारने में नाकाम रही। जिसके बाद भारत सरकार ने एग्रीमेंट के क्लॉज XVIII के तहत प्रॉपर्टी पर दोबारा कब्जा करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल किया था।

सरकार द्वारा दोबारा कब्जा लिए जाने के बाद, कंपनी ने 1960 में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में केस दायर किया था, जिसका फैसला लंबे समय बाद कंपनी के पक्ष में आया था। अब अपीलीय अदालत ने सरकार के दावों को सही माना है। दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल इस मुख्य अपील को स्वीकार कर लिया है और विस्तृत सुनवाई के लिए 23 जुलाई 2026 की तारीख मुकर्रर की है।

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