गैस सिलेंडर के लिए मिलेंगे तीन हजार रुपए, सीधे खाते में आएंगे पैसे; जानें पूरी डिटेल
बढ़ती महंगाई के दौर में सामान्य परिवारों के घरेलू बजट को राहत देने के मकसद से गोवा प्रशासन ने एक अहम कदम उठाया है। राज्य के योग्य नागरिकों को हर वर्ष रसोई ईंधन की खरीद में मदद के लिए 3000 रुपये की वित्तीय इमदाद दी जाएगी। यह सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी ताकि वे साल भर में तीन सिलेंडरों का खर्च आसानी से निकाल सकें। इस कदम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सीधे आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
पंचायत और विधायक दफ्तरों से प्रक्रिया शुरू
इस कल्याणकारी पहल से जुड़ने के लिए नागरिकों को निर्धारित प्रपत्र भरकर औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। शनिवार 5 सितंबर से ग्राम पंचायतों के साथ-साथ स्थानीय विधायकों के कार्यालयों पर इसके पर्चे मिलने शुरू हो गए हैं। प्रशासन की तैयारी के अनुसार जांच पूरी होते ही 9 सितंबर से पात्र लोगों के खातों में आर्थिक राशि का हस्तांतरण भी प्रारंभ कर दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 के विधानसभा संग्राम के समय सत्तारूढ़ दल ने जनता से तीन रिफिल मुफ्त मुहैया कराने का संकल्प जताया था जिसे अब वित्तीय पोषण के रूप में धरातल पर उतारा जा रहा है।
लाभ पाने के लिए अनिवार्य योग्यता और जरूरी कागजात
इस सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़ने के इच्छुक गोवा के मूल निवासियों को फॉर्म के साथ अपनी बैंक डायरी पहचान प्रमाण पत्र और मतदाता कार्ड की फोटोकॉपी संलग्न करनी होगी। सत्यापन प्रक्रिया सफल रहने पर ही तय धनराशि खाते में क्रेडिट की जाएगी। सरकार सिलेंडरों की प्रत्यक्ष आपूर्ति करने के बजाय नकद सहयोग दे रही है जिससे नागरिक अपनी जरूरत के मुताबिक बुकिंग और खरीद कर सकें।
दक्षिण भारत में भी जोर पकड़ रही रसोई गैस सब्सिडी की राजनीति
रसोई ईंधन पर नकद रियायत देने का यह चलन केवल पश्चिमी तट तक सीमित नहीं है बल्कि दक्षिण के राज्यों में भी इसका बड़ा असर दिख रहा है। तमिलनाडु में नवगठित प्रशासन के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने भी रियायती दरों पर ईंधन सहायता का बड़ा कदम उठाया है। चुनाव पूर्व घोषित 'अन्नपूर्णी सुपर सिक्स' संकल्प के अंतर्गत हर घर को सालाना छह मुफ्त सिलेंडरों का भरोसा दिया गया था जिसकी शुरुआत पहले चरण में तीन रिफिल के नकद अनुदान से की जा रही है।
इस दक्षिणी राज्य में ढाई लाख रुपये तक की सालाना आमदनी वाले घरों छोटे काश्तकारों दिव्यांगों और समाज के वंचित तबकों को प्राथमिकता दी गई है। इस पहल से करीब 1.30 करोड़ से अधिक परिवारों को सीधे संबल मिलने का अनुमान है। पोंगल 2027 के पावन पर्व से प्रभावी होने जा रही इस महात्वाकांक्षी व्यवस्था के लिए राज्य के खजाने से प्रतिवर्ष चार हजार करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट तय किया गया है।