रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी! 7 बड़े रूट होंगे 4 लाइन के, कम होगी ट्रेनों की लेटलतीफी
देशभर में लगातार बढ़ती रेल यात्रियों की संख्या और माल ढुलाई की मांग को सुगम बनाने के लिए केंद्र सरकार ने भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाया है।
रेल नेटवर्क की परिचालन क्षमता को नई ऊंचाई देने और व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों की लेटलतीफी व भीड़भाड़ को खत्म करने के मकसद से कई अहम मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना का सीधा लाभ न केवल रोजाना सफर करने वाले लाखों मुसाफिरों को मिलेगा, बल्कि औद्योगिक माल ढुलाई की रफ्तार भी दोगुनी हो सकेगी।
11 हजार किमी हाई-डेंसिटी नेटवर्क होगा 4-लेन, ट्रेनों की बढ़ेगी रफ्तार
भारतीय रेलवे के लगभग 11,000 किलोमीटर लंबे हाई-डेंसिटी नेटवर्क (HDN) पर देश के कुल रेल यातायात का एक बहुत बड़ा हिस्सा निर्भर करता है। पटरियों पर बढ़ते अत्यधिक दबाव को कम करने के लिए सरकार ने देश के सात सबसे व्यस्त रेल गलियारों को चरणबद्ध तरीके से फोर-लेन (चार पटरियों वाला) बनाने की योजना पर काम तेज कर दिया है।
इस वृहद योजना के दायरे में देश के प्रमुख महानगरों और औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले सात लाइफलाइन रूट शामिल हैं—दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-चेन्नई, चेन्नई-मुंबई, मुंबई-दिल्ली, दिल्ली-चेन्नई, मुंबई-हावड़ा और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाला दिल्ली-गुवाहाटी रेल मार्ग। इन मार्गों के पूरी तरह चार लेन में तब्दील होने से ट्रेनों के क्रॉसिंग के दौरान होने वाली देरी खत्म होगी और सेमी-हाईस्पीड ट्रेनों के लिए अलग डेडिकेटेड ट्रैक उपलब्ध हो सकेगा।
10,783 करोड़ की लागत से 5 राज्यों के 14 जिलों में बिछेगा पटरियों का जाल
रेलवे अवसंरचना को आधुनिक बनाने की इस ताजा कड़ी में केंद्र सरकार ने करीब 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को वित्तीय मंजूरी प्रदान की है। ये परियोजनाएं देश के 5 प्रमुख राज्यों के 14 महत्वपूर्ण जिलों से होकर गुजरेंगी। इन निर्माण कार्यों के पूरे होने से अत्यधिक भार झेल रहे रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइनें बिछाई जाएंगी। इससे यात्री ट्रेनों की समयबद्धता में क्रांतिकारी सुधार आएगा और मालगाड़ियों के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त स्लॉट मिल सकेंगे, जिससे लाइन क्षमता का संकट काफी हद तक दूर हो जाएगा।
औद्योगिक विकास और व्यापारिक कनेक्टिविटी को मिलेगी नई गति
रेल पटरियों के इस चौड़ीकरण और दोहरीकरण-तिहरीकरण का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। नई रेल लाइनों के अस्तित्व में आने से कोयला, खनिज, कृषि उत्पाद और औद्योगिक सामानों की ढुलाई बहुत कम समय और लागत में संभव हो सकेगी। बंदरगाहों, खनन क्षेत्रों और विनिर्माण केंद्रों के बीच निर्बाध रेल संपर्क स्थापित होने से व्यापारिक सुगमता बढ़ेगी। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अंतर-राज्यीय परिवहन व्यवस्था को एक आधुनिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल गति प्राप्त होगी।