"मैं खुदकुशी कर लूंगा...", जब मंत्रियों के बर्ताव से आहत होकर बेहद भावुक हो गए थे पूर्व PM मनमोहन सिंह; पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का बड़ा खुलासा
भारतीय राजनीति के इतिहास में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को हमेशा एक बेहद शांत, गंभीर और शालीन राजनेता के रूप में जाना जाता रहा है। वे अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने के बजाय हमेशा शांत रहकर काम करने में विश्वास रखते थे। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब अपने ही कैबिनेट मंत्रियों के गैर-जिम्मेदाराना बर्ताव और हरकतों से आहत होकर वे इस कदर भावुक और परेशान हो गए थे कि उन्होंने एक बेहद चौंकाने वाली बात कह दी थी। देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) एस.वाई. कुरैशी (S.Y. Quraishi) ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इस बड़े और अनसुने वाकये का खुलासा किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने खोल दिए सत्ता के गलियारे के दबे राज
एस.वाई. कुरैशी ने अपनी नई किताब और हालिया इंटरव्यू के दौरान उस दौर का जिक्र किया जब केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। कुरैशी ने बताया कि एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील बैठक के दौरान कैबिनेट के कुछ बड़े मंत्रियों ने जिस तरह का रवैया अपनाया, उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री को अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। डॉ. सिंह को मंत्रियों से इस तरह के असहयोग और गैर-गंभीर रुख की बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी।
आखिर किस बात पर पूर्व पीएम के मुंह से निकले थे ये भावुक शब्द
कुरैशी के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में चल रही उस खास बैठक के दौरान जब कुछ मंत्रियों ने राष्ट्रीय महत्व के एक मुद्दे पर जिद पकड़ ली और प्रधानमंत्री की बातों व दिशा-निर्देशों को दरकिनार करना शुरू कर दिया, तब डॉ. मनमोहन सिंह का सब्र का बांध टूट गया। मंत्रियों की इस हरकत पर गहरा दुख और लाचारी व्यक्त करते हुए उन्होंने बेहद भावुक स्वर में कहा, "अगर इस तरह की चीजें चलती रहीं और आप लोग ऐसा ही बर्ताव करते रहे, तो मैं खुदकुशी (आत्महत्या) कर लूंगा।" शांत स्वभाव वाले मनमोहन सिंह के मुंह से निकले इन भारी शब्दों को सुनकर उस समय कमरे में मौजूद सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी सन्न रह गए थे।
शांत चेहरे के पीछे छिपे लाचारी और तनाव का बड़ा सबूत
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का यह खुलासा इस बात की गवाही देता है कि 'गठबंधन की राजनीति' के उस दौर में प्रधानमंत्री की कुर्सी पर रहते हुए डॉ. मनमोहन सिंह ने कितना भारी मानसिक दबाव और तनाव झेला था। कूटनीतिक और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ होने के बावजूद, उन्हें अक्सर अपनी ही सरकार के भीतर आंतरिक कलह, मंत्रियों की मनमानी और गठबंधन के सहयोगियों के दबाव का सामना करना पड़ता था। आलोचक भले ही उन्हें 'मौन मोहन सिंह' कहते रहे हों, लेकिन यह वाकया दिखाता है कि वे भीतर ही भीतर स्थितियों से कितने ज्यादा आहत थे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ खुलासा, राजनीतिक विश्लेषकों के बीच छिड़ी बहस
एस.वाई. कुरैशी द्वारा साझा किया गया यह ऐतिहासिक किस्सा सामने आते ही सोशल मीडिया और मुख्यधारा की खबरों में तेजी से वायरल हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक और आम यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यह घटना डॉ. मनमोहन सिंह की ईमानदारी और उनकी संवेदनशीलता को दर्शाती है, जो देश के लिए बेहतर करना चाहते थे लेकिन राजनीतिक मजबूरियों ने उनके हाथ बांध रखे थे। वहीं, इस खुलासे के बाद एक बार फिर उस दौर के कॉरपोरेट और राजनीतिक कल्चर पर बड़ी बहस छिड़ गई है।