ममता बनर्जी की बढ़ी टेंशन, किराये का मुख्यालय खाली करने का अल्टीमेटम, गुस्से में पुलिस थाने पहुंचा बिल्डिंग मालिक
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय जबरदस्त भूचाल आया हुआ है। एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर विधायकों की बगावत और दो गुटों में बंटने की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी सुप्रीमो और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने एक और बेहद अजीबोगरीब और बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। खबर है कि कोलकाता में जिस आलीशान इमारत में इस समय टीएमसी का अस्थाई राष्ट्रीय मुख्यालय चल रहा है, उसके मकान मालिक ने ममता बनर्जी की पार्टी को अपनी प्रॉपर्टी तुरंत खाली करने का सख्त अल्टीमेटम दे दिया है। बात सिर्फ जगह खाली करने की मांग तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि बिल्डिंग मालिक गुस्से में इस मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराने सीधे पुलिस थाने तक पहुंच गया है।
साल 2025 में ही खत्म हो चुका है एग्रीमेंट, जुलाई तक का वादा भी टूटा
कोलकाता के ईएम बाईपास के पास स्थित कैनाल साउथ (A/P-1/A Canal South) रोड पर मौजूद इस चर्चित संपत्ति के असली मालिक मोंटू साहा हैं। साहा परिवार के अनुसार, साल 2022 में जब टीएमसी के मुख्य कार्यालय 'तृणमूल भवन' के रिनोवेशन (मरम्मत) का काम शुरू हुआ था, तब पार्टी इस बिल्डिंग में शिफ्ट हुई थी। इससे पहले साहा परिवार यहां 'अरब रेसीडेंसी' नाम का एक मशहूर होटल चलाता था। मोंटू साहा का दावा है कि टीएमसी के साथ किया गया रेंटल एग्रीमेंट साल 2025 के आखिर में ही पूरी तरह समाप्त हो चुका है। वे पिछले कई महीनों से लगातार पार्टी के बड़े नेताओं से अपनी कीमती जगह खाली करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सत्ता के रसूख के आगे उनकी एक नहीं सुनी जा रही है।
बात करने नहीं आया कोई नेता, पिता-पुत्र ने खटखटाया पुलिस का दरवाजा
बिल्डिंग खाली करने को लेकर चल रहे इस हाई-प्रोफाइल विवाद के बीच, रविवार को मोंटू साहा अपने बेटे अमित साहा के साथ अचानक अपनी प्रॉपर्टी पर पहुंचे। वे वहां मौजूद टीएमसी के शीर्ष पदाधिकारियों से इस मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर आखिरी बात करना चाहते थे। लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पार्टी दफ्तर में बात करने के लिए टीएमसी का कोई भी जिम्मेदार नेता या पदाधिकारी मौजूद नहीं था। कई घंटों तक दफ्तर के बाहर इंतजार करने के बाद, पिता-पुत्र का सब्र का बांध टूट गया और वे सीधे नजदीकी पुलिस स्टेशन के लिए रवाना हो गए, जहां उन्होंने पार्टी के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
"पार्टी ने किया था जुलाई तक का वादा, अब कानूनी तौर पर बाहर निकालेंगे"
बिल्डिंग मालिक मोंटू साहा के बेटे अमित साहा ने मीडिया से बातचीत में अपने गुस्से का इजहार करते हुए कहा, 'पिछले साल के आखिर में जब हमारा रेंटल कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया, तो हमने सम्मानपूर्वक टीएमसी नेतृत्व से कई बार संपर्क किया और अपनी बिल्डिंग वापस मांगी। इस इमारत में बड़े पैमाने पर मरम्मत का काम होना बाकी है और हमें अपने निजी बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए भी अब इस जगह की सख्त जरूरत है।' अमित ने आगे बताया, 'शुरुआत में पार्टी नेताओं ने हमसे वादा किया था कि वे इस साल जुलाई तक हर हाल में पूरी बिल्डिंग खाली कर देंगे, लेकिन अब वे अपने वादे से मुकर रहे हैं। पिछले कुछ समय से पार्टी का कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति इस गंभीर विषय पर बात करने के लिए फोन तक नहीं उठा रहा है। हमारे पास पुलिस और कोर्ट की शरण में जाने के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।'
टीएमसी नेता का पलटवार - 'किराया देकर कोई एहसान नहीं किया'
इस पूरे मामले पर जब मीडिया ने टीएमसी के एक स्थानीय कद्दावर नेता से संपर्क किया, तो उन्होंने बिल्डिंग मालिक के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए एक विवादित बयान दे दिया। टीएमसी नेता ने पलटवार करते हुए कहा कि मोंटू साहा ने अपनी संपत्ति पार्टी को किराये पर देकर कोई समाज सेवा या एहसान नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रॉपर्टी को किराये पर देने के बदले में साहा परिवार को सरकार और पार्टी की तरफ से कई बड़े और मुनाफेदार कॉन्ट्रैक्ट (ठेके) दिलवाए गए हैं, जिससे उन्होंने भारी कमाई की है।
असली 'तृणमूल भवन' पर भी बागी विधायक जावेद खान ने ठोका दावा
टीएमसी के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं होतीं। एक तरफ किराये की बिल्डिंग खाली करने का दबाव है, तो दूसरी तरफ तोपसिया रोड पर स्थित टीएमसी के असली और स्थायी मुख्यालय 'तृणमूल भवन' पर भी मालिकाना हक को लेकर पार्टी के भीतर ही जंग छिड़ गई है। टीएमसी के बागी विधायक जावेद खान ने इस मुख्य इमारत पर अपना दावा ठोकते हुए पार्टी नेतृत्व की नींद उड़ा दी है। जावेद खान का साफ कहना है कि जिस तोपसिया रोड के प्लॉट पर भव्य तृणमूल भवन खड़ा है, वह असल में उनके दादा-परदादा की पुश्तैनी जमीन है। बागी विधायक ने मीडिया के सामने खुलेआम चुनौती देते हुए कहा, 'मेरे पास कोर्ट और सरकारी दफ्तरों के वो सारे पुख्ता कानूनी दस्तावेज और सबूत मौजूद हैं, जो यह साबित करते हैं कि तोपसिया रोड का यह पूरा प्लॉट कानूनी तौर पर सिर्फ और सिर्फ मेरे परिवार का है।'