Navratri 2021: यूपी से लेकर तमिलनाडु तक कैसे मनाई जाती है नवरात्रि, यहां जानें परंपराएं और रीति रिवाज

नवरात्रि का उत्सव अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है लेकिन त्योहार का मुख्य विषय बुराई पर अच्छाई की जीत है। हालांकि...

नवरात्रि के दिनों में बंगाल की पंडाल-हॉपिंग बेहद लोकप्रिय है। इसी के साथ अलग-अलग राज्यों में भी नवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार नवरात्रि का अर्थ है (नव) रातें (रात्रि), शरद ऋतु के दौरान लगातार नौ रातों में मनाई जाती है। नवरात्रि का उत्सव अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है लेकिन त्योहार का मुख्य विषय बुराई पर अच्छाई की जीत है। हालांकि नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा को समर्पित है, लेकिन दक्षिण भारत के कुछ राज्य इसे ज्ञान की देवी सरस्वती जैसे अन्य हिंदू देवताओं को भी समर्पित करते हैं। आज हम आपको बताएंगे भारत के विभिन्न राज्यों में किस तरह नवरात्रि मनाई जाती है।

Navratri 2021

यूपी और बिहार

यूपी और बिहार में नवरात्रि का पर्व रामलीला के साथ मनाया जाता है। हिंदू महाकाव्य रामायण से भगवान राम के जीवन को नाटकीय रूप में सिनेमाघरों, मंदिरों आदि में दिखाया जाता है। यूपी और बिहार राज्यों में दुर्गा पूजा के तरीके में भी कई समानताएं हैं। वे पूजा के अंतिम दिनों में छोटी लड़कियों को पूजते और जीमते हैं।

वेस्ट बंगाल और असम

पश्चिम बंगाल में पंडाल लगा कर दुर्गा, गणेश, कार्तिकेय, सरस्वती और लक्ष्मी की सुंदर मूर्तियों को स्थापित किया जाता है। पुजारी चार दिनों की अवधि के लिए शास्त्रों के आदेश के अनुसार संस्कार करते हैं। दशमी को देवी को धूमधाम से विदा किया जाता है। असम, झारखंड और त्रिपुरा में भी इसी परंपरा का पालन किया जाता है। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान ढाक की थाप पर नाचना, पंडाल-हॉपिंग, स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद उठाना, सुंदर पोशाक पहनना आवश्यक माना जाता है।

राजस्थान

दशहरा मेला राजस्थान में त्योहारी सीजन की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान में नवरात्रि का प्रसिद्ध दशहरा मेला देखने लायक होता है। यहां रावण का सबसे ऊंचा, 72 फुट का पुतला लगाया जाता है और फिर उस दशहरे के दिन जलाया जाता है। इसके बाद यहां के विभिन्न शहरों में धनतेरस तक 20 दिनों के मेले का आयोजन किया जाता है, जो दिवाली की शुरुआत का प्रतीक होता है।

गुजरात

गुजरात में नवरात्रि मनाने का एक अनूठा तरीका है। दुर्गा और उनके नौ अवतारों की विधिवत पूजा करने के लिए भक्त उपवास का रखते हैं। उपवासकरने वाली महिलाएं हर शाम को घर में दिया जलती है और माता की आराधना करती हैं। गुजरात में नवरात्रि को गरबा रास के लिए भी जाना जाता है, जो पुरुषों और महिलाओं द्वारा गरबो या दुर्गा की मूर्ति के आसपास किया जाने वाला एक पारंपरिक नृत्य है।

आंध्र प्रदेश

नवरात्रि का पर्व आंध्र प्रदेश की महिलाओं के लिए वैवाहिक आनंद के साथ आशीर्वाद देने के लिए, सौम्य देवी मां गौरी की पूजा की जाती है। वहीं अविवाहित लड़कियां अपनी पसंद के जीवनसाथी की तलाश में सांप्रदायिक पूजा में शामिल होती हैं। इस पर्व को स्थानीय यानी तेलुगु भाषा में बथुकम्मा पांडुगा कहा जाता है जिसका अर्थ है देवी मां, जीवित आओ! देवी मां की पूजा के लिए महिलाएं स्थानीय फूलों का प्रतोग करके समय-सम्मानित शैली में फूलों के ढेर बनाती हैं। उत्सव के अंतिम दिन इस फूलों के ढेर को किसी झील या नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल कई देवी मंदिर हैं। ऐसे में इस राज्य में यह त्योहार धूमधाम से मनाया जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश में नवरात्रि के समारोह उस वक्त शुरू होते हैं जब शेष भारत पूजा को बंद करने के निकट होता है। कुल्लु घाटी के ढालपुर मैदान में, भगवान रघुनाथ (राम) की नौ दिनों तक चलने वाले उत्सव के दौरान अन्य देवताओं के साथ पूजा की जाती है। त्योहार के दसवें दिन को कुल्लू दशहरा कहा जाता है।

तमिलनाडु

दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में नवरात्रि के दिनों में सिर्फ मां दुर्गा की ही नहीं बल्कि लक्ष्मी और सरस्वती जैसी अन्य हिंदू देवी-देवताओं की भी पूजा की जाती है। किंवदंतियों के अनुसार, तीन देवी-देवताओं को तीन अलग-अलग दिनों में पूजा जाता है। इन दिनों में लोग एक-दूसरे के साथ कपड़े, मिठाई और नारियल जैसे उपहारों का आदान-प्रदान करते हैं। यहां नवरात्रि समारोहों का एक अन्य रिवाज कोलू (गुड़िया की मूर्तियां) का प्रदर्शन होता है जिन्हें हिंदू धर्मग्रंथों से लोकप्रिय लेजेंड्स को बताने के लिए अरेंज किया जाता है।

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