‘आस्था की कोई कीमत नहीं’ स्लोगन को सच साबित कर रहा ‘एक करोड़ 25 लाख’ का बकरा

बकरे के मालिक ने लॉकडाउन के कारण इस सौदे में देरी की बात कही है। बकरे की यह कीमत बकरे की नहीं, बल्कि आस्था की लगाई जा रही है।

कानपुर देहात॥ कानपुर देहात जिले के मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर डेरापुर तहसील क्षेत्र में एक बकरे की कीमत विदेशी लोगों ने एक करोड़ तक लगा दी है। ये डील 25 लाख की कीमत के चलते रुकी हुई है। बकरे के मालिक ने लॉकडाउन के कारण इस सौदे में देरी की बात कही है। बकरे की यह कीमत बकरे की नहीं, बल्कि आस्था की लगाई जा रही है।

goat's value One crore 25 lakh

ये कहावत ‘आस्था की कोई कीमत नहीं होती है’ इसका उदाहरण कानपुर देहात जिले के छोटे से गांव में पैदा हुआ बट्टू के लिए लगाई गई रकम है। दरअसल ‘बट्टू’ एक बकरे का नाम है जो जिले के डेरापुर तहसील क्षेत्र के रतनियापुर गांव में रहने वाले शिव कुमार तिवारी के घर पैदा हुआ था। बट्टू के पैदा होने पर शिव कुमार तिवारी को यह पता नहीं था कि जिसे वह साधारण जानवर समझ रहे हैं, वह एक दिन उनको करोड़ों रुपये तक दिला सकता है।

बट्टू के पैदा होने के 14 दिन बाद रतनियापुर में एक फकीर आया। जब उसने बकरे को देखा तो शिव कुमार से बोला तुम बहुत नसीब वाले हो। यह सुनकर शिवकुमार सोच में पड़ गए कि बकरे में ऐसा क्या देख लिया फकीर ने। जब यह बात फकीर से पूछी तो उसने बताया कि बकरे के पेट में दोनों ओर “अल्लाह” लिखा हुआ है।

शिव कुमार ने इस बात को सुनकर बकरे का नाम बट्टू रख दिया और यह बात धीरे-धीरे जिले से दुबई तक पहुंच गई। फिर क्या गांव में दलालों का आना शुरू हो गया और बकरे की नहीं, बल्कि आस्था की कीमत लगने लगी।

इस कीमत की रकम सुनकर विश्वास होना थोड़ा मुश्किल था, पर जब शिव कुमार ने खुद बताया कि उनके बट्टू की कीमत एक करोड़ रुपये लग चुकी है। बताया कि बकरे की कीमत एक करोड़ 25 लाख लगाई थी। तब-तक लॉकडाउन लग गया, नहीं तो अब तक बकरे को कोई न कोई खरीद लेता। फिलहाल अभी तक देश ही नहीं, विदेश से पांच से छह व्यापारी आ चके हैं। बहुत जल्द ही बकरे की बिक्री हो जाएगी।

बट्टू को मिल रहा पौष्टिक आहार

शिव कुमार का पूरा परिवार बकरे की आव भगत में लगा हुआ है। उसकी इस तरह सेवा की जा रही है, जैसे घर में मेहमान आया हो। बकरे को भुने हुए चने, गेहूं और सभी पौष्टिक आहार दिया जा रहा है, जिससे बकरे को देखने वाला व्यक्ति और उसकी ओर आकर्षित हो जाये।

बकरे की हो रही कड़ी सुरक्षा

फिलहाल अभी बकरे की सुरक्षा ऐसे की जा रही है, जैसे घर में रखे सोने व जेवरात की होती हो। शिव कुमार को डर है कि कहीं उनके बकरे को कोई चोरी न कर ले। इसके लिए कोई न कोई एक व्यक्ति हमेशा उसके साथ रहता है।

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