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किसान आंदोलन फिर से सुलगने लगा है। जहां कुछ किसान संगठन दिल्ली को घेरने की तैयारी में हैं, वहीं भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने चंडीगढ़ का घेराव करने का ऐलान किया है। किसान यूनियन ने किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए अगला एक्शन प्रोग्राम तय करते हुए 24 फरवरी को चंडीगढ़ में पक्के मोर्चे की घोषणा की है।

बता दें कि पंजाब सरकार के विरूद्ध किसान-मजदूर समर्थक नई कृषि नीति और खेती के अन्य मुद्दों के समाधान को लेकर भारतीय किसान यूनियन (उग्राहां) द्वारा उपायुक्त कार्यालयों के सामने दिया जा रहा धरना शनिवार को समाप्त हो गया। संगरूर में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने इस पांच दिवसीय मार्च के समापन पर बोलते हुए 24 फरवरी को चंडीगढ़ में स्थाई मार्च आयोजित करने की घोषणा की। मोर्चे की तैयारियों के लिए 13, 14 और 15 फरवरी को जिला स्तरीय सम्मेलन होंगे।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के 16 शहरों में बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग किसानों की मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। इन प्रदर्शनों में भारी भीड़ उमड़ने के बावजूद राज्य सरकार का कोई भी प्रतिनिधि किसानों का हालचाल लेने नहीं आया। इसलिए 24 फरवरी से पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में औपचारिक मार्च शुरू किया जाएगा।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार जो खेती मॉडल लायी है वह किसान विरोधी है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे बना दिये गये हैं कि उत्पादन बढ़ाकर भी किसानों का कर्ज नहीं चुकाया जा सकता। एक-एक घर से तीन-तीन औरतें उठने लगी हैं। खेती को संकट से बाहर निकालने के बजाय कॉरपोरेट को सौंपा जा रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कृषि को बढ़ावा देने से ही देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा। कृषि एक ऐसा साधन है जो देश के बड़े हिस्से को रोजगार उपलब्ध करा सकता है। अगर रोजगार की समस्या हल हो जाए तो किसी को किसी से कुछ मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही सरकारों को मुफ्त सुविधाएं देने की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा कि 24 फरवरी के चंडीगढ़ मार्च की तैयारी के लिए 14 फरवरी को संगरूर जिले के शेरोन गांव में एक कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।