जासूसी कांड पर विपक्ष संसद में बनाएगा मायाजाल, भेदने को मोदी सरकार ने बनाई ये रणनीति

आज से शुरू होने संसद के मॉनसून सत्र में सरकारी विरोधी पार्टियां इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं

पेगासस सॉफ्टवेयर (Pegasus Software) के माध्यम से इंडियन फोन नंबर्स को निशाना बनाए जाने से जुड़े खुलासों को विपक्ष ने ‘गंभीर’ बताया है। आज से शुरू होने संसद के मॉनसून सत्र में सरकारी विरोधी पार्टियां इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में हैं।

Pegasus Scandal

हालांकि इस बारे में अंतरिम निर्णय सोमवार सवेरे होने वाली विपक्षी दलों की मीटिंग में होगा। दूसरी ओर, सरकार इस पूरे विवाद में जरा भी कमजोर दिखना नहीं चाहती। सरकार ने एक मजबूत डिफेंस तैयार किया है जिसके माध्यम से विपक्ष के हमलों को कुंद किया जाएगा।

कांग्रेस के पास मोदी सरकार को घेरने का मौका

सियासी पार्टी कांग्रेस ने कहा कि इस मुद्दे को उठाया ही जाना चाहिए। कांग्रेस ने इसे ‘सरकारी सर्विलांस’ करार देते हुए कहा कि यह संवैधानिक लोकतंत्र के ढांचे और लोगों की निजता पर करारी चोट है। राज्‍यसभा में कांग्रेस के उप-नेता आनंद शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार यह कहकर बच नहीं सकती कि उन्‍हें वेरिफाई करना होता है या कुछ और। ये बेहद गंभीर मसले हैं। कौन सी एजेंसियां हैं जिन्‍हें मालवेयर मिला है? किन एजेंसियों ने पेगासस खरीदा? यह कोई ऐसी बात नहीं है जिससे सरकार भाग सके। शर्मा ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग रखी है।

तो वहीं दिग्गज नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सरकार को ये बताना चाहिए कि उसने NSO ग्रुप की सेवाएं ली या नहीं। पेगासस सॉफ्टवेयर NSO का ही उत्‍पाद है।

थोड़ा भी कमजोर नहीं दिखना चाहती सरकार

विपक्ष के हल्‍लाबोल से सरकार जरा भी डिस्ट्रब नहीं नजर आ रही। सरकार ने फिर दोहराया है कि ‘कोई अनाधिकृत इंटरसेप्‍शन’ नहीं हुआ है। इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और सूचना मंत्रालय (MEITY) के एक सूत्र के हवाले से एक मीडिया चैनल ने कहा कि हमें किसी बात का डर नहीं है, सरकार के पास छिपाने को कुछ नहीं। हम हर प्रश्न का उत्तर देंगे। न्‍यूज आर्टिकल से कुछ साबित नहीं होता। असल में, पेगासस को सरकार से जोड़ने के लिए पिछले प्रयास फेल हो गए हैं।

‘जासूसी कांड’ पर क्‍या बोली मोदी सरकार?

सोमवार को जारी रिपोर्ट्स को केंद्र से सिरे से खारिज कर दिया। सरकार की तरफ से कहा गया कि ‘इन बातों का कोई ठोस आधार नहीं है।’ दावों को नकारते हुए सरकार ने कहा कि ‘भारत एक लचीला लोकतंत्र है और वह अपने सभी नागरिकों के निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के तौर पर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

 

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