भूत-प्रेत के डर से गांव छोड़े लोग, खंडहर बने घर, दिल को झकझोर देगी कहानी

लखनऊ: आज के समय में अगर भूतों की बात की जाए तो शायद ही कोई इस पर यकीन करेगा. लेकिन यहां हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बता रहे हैं, जहां भूतों के कारण घर ही नहीं पूरा गांव सूना हो गया है। वो भी एक-दो साल से नहीं बल्कि 15 साल से ये गांव वीरान पड़ा है. उत्तर प्रदेश से सटे मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का चौका गांव कभी लोगों की आबादी से गुलजार रहता था. लेकिन आज यह गांव भूत-प्रेत की कहानी के कारण वीरान है। 100 घरों और करीब 300 की आबादी वाले इस गांव में आज सिर्फ चार लोग रह रहे हैं। कहा जा रहा है कि भूत-प्रेतों के कारण यहां लोग बीमार पड़ने लगे, जिससे गांव के लोग पलायन करने लगे और आज पूरा गांव सूना हो गया है.

गांव का असली सच क्या है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन फिलहाल तो बर्बाद हुआ गांव कई सवालों को जन्म दे रहा है. चाका गांव की तस्वीर यह बताने के लिए काफी है कि कुछ ऐसा है, जिसके डर ने लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित चौका गांव का खंडहर घर यह बताने के लिए काफी है कि एक बार यह गांव भी लोगों से गुलजार था. यहां के आसपास के लोग बताते हैं कि 15 साल पहले यहां करीब 300 की आबादी 100 घरों में रहती थी। लेकिन डेढ़ साल पहले यहां की महिलाएं अजीबोगरीब हरकतें करने लगीं और धीरे-धीरे लोग बीमार पड़ने लगे। गांव में भूत-प्रेत के भय से लोग भागने लगे और देखते ही देखते पूरा गांव सूना हो गया। अब इस गांव में कुल 4 लोग बचे हैं, जिनमें एक चौकीदार और दो पंडित हैं।

गांव के बच्चू यादव और आत्माराम के मुताबिक पहले इस गांव में 100 घर मौजूद थे. सब अच्छे से रह रहे थे। 15 साल पहले गांव में अचानक से लोग बीमार पड़ने लगे, न जाने क्या हुआ। महिलाएं अजीबोगरीब हरकतें करने लगीं। आत्माराम बताते हैं कि भूत-प्रेत के कारण लोग परेशान होने लगे। बच्चू यादव का कहना है कि इसके बाद धीरे-धीरे वह गांव छोड़ने लगा। आज गांव में केवल चार लोग रह रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि गांव वीरान हो गए, घर उजड़ गए, लेकिन प्रशासन ने कभी इस गांव की सुध नहीं ली. लेखपाल को इस गांव का हाल तक पता भी नहीं चला। कहा जाता है कि लंबे समय तक खाली रहने के कारण अधिकांश घर खंडहर हो गए हैं। कुछ घरों की छतें भी टूट गई हैं। पूरे गांव में सन्नाटा है। गांव में हैंडपंप चलाने से सन्नाटा टूटता है, वहीं नल की आवाज से भय पैदा होता है। प्रशासन की लापरवाही से लोगों में भूत-प्रेत का भय बना हुआ है।