पंजाब कांग्रेस में बढ़ी अंदरूनी खींचतान, चुनाव से पहले नेताओं की नाराजगी बनी बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस में हाल में हुए संगठनात्मक बदलाव के बाद पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती अब अंदरूनी एकजुटता बन गई है। विधानसभा चुनाव से पहले कई वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। इससे पार्टी की चुनावी तैयारियों और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी असर पड़ सकता है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के घर हुई बड़ी बैठक और कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
चन्नी के घर जुटे कई बड़े नेता
मोरिंडा स्थित चरणजीत सिंह चन्नी के घर पर घंटों चली मीटिंग में 60 से ज्यादा नेता शामिल हुए। इनमें हाल ही में बनी चुनाव समितियों के सदस्य भी मौजूद रहे। साथ ही 20 से अधिक मौजूदा और पूर्व विधायक भी बैठक का हिस्सा बने।
बैठक में पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया, ओ.पी. सोनी, भरत भूषण आशु और परमिंदर पाल पिंकी जैसे वरिष्ठ नेता पहुंचे। दिवंगत गायक सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी बैठक में शामिल हुए।
नाराज नेताओं ने उठाई बड़ी मांग
जानकारी के अनुसार चुनाव समितियों में शामिल कई असंतुष्ट नेताओं ने अपने इस्तीफे चरणजीत सिंह चन्नी को सौंप दिए हैं। इन नेताओं ने चन्नी को अगले 15 दिनों के भीतर पार्टी हाईकमान के सामने उनकी बात रखने की जिम्मेदारी दी है।
बताया जा रहा है कि असंतुष्ट नेता अगले सप्ताह विदेश से लौटने वाले राहुल गांधी से भी मिलने का समय मांगेंगे ताकि अपनी शिकायतें सीधे उनके सामने रख सकें।
चन्नी ने क्या कहा
बैठक के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं ने उनसे पंजाब की जनता और कार्यकर्ताओं की भावनाएं कांग्रेस नेतृत्व तक पहुंचाने का आग्रह किया है।
पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा ने भी कहा कि सभी नेता कांग्रेस की जीत के लिए पूरी मेहनत करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि पंजाब कांग्रेस कमेटी की नई सूची पर दोबारा विचार होना चाहिए।
राजा वड़िंग समर्थकों का जवाब
दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के समर्थकों ने इस बैठक को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उनके करीबी नेताओं का कहना है कि यह शक्ति प्रदर्शन सफल नहीं रहा।
सूत्रों के अनुसार बैठक में शामिल और अनुपस्थित नेताओं की पूरी जानकारी पार्टी हाईकमान को भेज दी गई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और विवाद को शांत करने के लिए दोनों पक्षों से बातचीत कर सकता है।