विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में बड़ा सियासी फेरबदल: राजा वड़िंग ने छोड़ा पद, जानें क्या रहेगी रणनीति
पंजाब की सियासत में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शक्ति संतुलन पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। राज्य में विपक्षी दल के तौर पर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी कांग्रेस अब अपने संगठनात्मक ढांचे की बड़ी सर्जरी करने जा रही है। लंबे समय से चल रही गुटबाजी और खींचतान के बीच प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अपनी कुर्सी छोड़ दी है। दिल्ली दरबार अब चुनावी समीकरणों को नए सिरे से साधने के लिए नेतृत्व में फेरबदल की अंतिम तैयारी कर चुका है।
चुनावी चौसर पर नए समीकरण की तलाश
सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और भाजपा की आक्रामक रणनीति का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व इस बार पंजाब में सामाजिक संतुलन को प्राथमिकता दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस दफा किसी अनुभवी हिंदू नेता को कमान सौंपने के मूड में है। इस दौड़ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संयुक्त कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला का पलड़ा सबसे भारी माना जा रहा है। सिंगला को इससे पहले जुलाई में चुनाव प्रबंधन तथा समन्वय समिति की जिम्मेदारी भी दी गई थी जिससे साफ है कि पार्टी उन पर भरोसा जता रही है।
फैसले पर राजा वड़िंग का रुख
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान के बीच राजा वड़िंग ने सार्वजनिक तौर पर खुलकर बोलने से परहेज किया है। उन्होंने इसे संगठन का घरेलू मामला बताते हुए सिर्फ इतना कहा कि सही वक्त आने पर ही वे अपनी बात विस्तार से रखेंगे। संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी उनसे राज्य के जमीनी हालात पर सीधी बातचीत की है। माना जा रहा है कि शीर्ष स्तर पर हुए इस बदलाव का सीधा असर राज्य कांग्रेस की तमाम जिला और ब्लॉक कमेटियों पर भी पड़ेगा।
नए नेतृत्व की दौड़ में ये दिग्गज भी शामिल
गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर के अवसर पर नए प्रदेश अध्यक्ष की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। कमान संभालने की होड़ में विजय इंदर सिंगला के अलावा कई अन्य दिग्गज भी पैर पसार रहे हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राणा केपी सिंह गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा हॉकी खिलाड़ी से राजनेता बने प्रगट सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर भी मंथन जारी है। अब देखना यह होगा कि चुनावी साल में यह बदलाव जमीनी कार्यकर्ताओं में कितना नया जोश भर पाता है।