रवनीत बिट्टू की छुट्टी, आरएसएस के तरूप चुग को राज्यसभा भेजकर चली सबसे बड़ी चाल
पंजाब विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक ऐसा सियासी दांव चला है जिसने विपक्षी दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बीजेपी आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की जगह राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। रवनीत बिट्टू का राजस्थान से राज्यसभा कार्यकाल इसी महीने समाप्त हो रहा था और माना जा रहा था कि उन्हें दोबारा मौका मिल सकता है, लेकिन पार्टी ने उनकी जगह संगठन के जमीनी और पुराने कार्यकर्ता पर भरोसा जताया है। आरएसएस (RSS) की मजबूत पृष्ठभूमि से आने वाले तरुण चुग को उच्च सदन में भेजकर बीजेपी ने पंजाब के कोर कैडर को बड़ा संदेश दिया है, जिससे आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।
कौन हैं तरुण चुग और क्यों पंजाब में माना जाता है इन्हें बड़ा चेहरा?
तरुण चुग मूल रूप से अमृतसर के नमक मंडी क्षेत्र के रहने वाले हैं और पंजाब की राजनीति में बीजेपी का एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय हिंदू चेहरा हैं। उनका परिवार कोई नया-नवेला बीजेपी समर्थक नहीं है, बल्कि पिछली तीन पीढ़ियों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। चुग ने साल 1989 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र राजनीति की सीढ़ियां चढ़नी शुरू की थीं। इसके बाद उन्होंने बीजेपी में एक बेहद साधारण बूथ इंचार्ज के रूप में अपने सफर की शुरुआत की। अपनी कड़ी मेहनत और सांगठनिक क्षमता के बल पर वह बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में महासचिव बनने वाले पंजाब के पहले नेता बने। वर्तमान में वह पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव, एससी मोर्चे के राष्ट्रीय प्रभारी के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और लेह-लद्दाख जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
रवनीत बिट्टू का पत्ता काटकर तरुण चुग पर क्यों खेला दांव?
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि आखिर केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू का टिकट काटकर तरुण चुग को तरजीह क्यों दी गई? दरअसल, लोकसभा चुनाव में हार का सामना करने के बावजूद रवनीत बिट्टू को केंद्र में मंत्री पद से नवाजा गया था, लेकिन पार्टी हाईकमान ने इस बार 'कार्यकर्ता-आधारित राजनीति' का एक बड़ा उदाहरण पेश किया है। बीजेपी नेतृत्व ने यह साफ संदेश दिया है कि बाहरी नेताओं के मुकाबले उन चेहरों को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी जिन्होंने बिना किसी निजी स्वार्थ के दशकों तक बूथ स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक संगठन को सींचा है। तरुण चुग को राज्यसभा भेजने के पीछे पुराने और वफादार कार्यकर्ताओं के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचाना है।
पंजाब चुनाव से पहले 'बाहरी बनाम पुराने' नेताओं में संतुलन साधने की कोशिश
पंजाब में अगले साल ही विधानसभा चुनाव होने हैं और पार्टी वहां अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयोग कर रही है। हाल ही में बीजेपी ने पंजाब प्रदेश की कमान पूर्व कांग्रेस विधायक केवल सिंह ढिल्लों को सौंपी थी। ऐसे में कांग्रेस से आए ढिल्लों को कमान मिलने के बाद पुराने कार्यकर्ताओं में किसी तरह की नाराजगी न पनपे, इसलिए तरुण चुग को देश की सबसे बड़ी पंचायत (राज्यसभा) में भेजकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है। माना जा रहा है कि दिल्ली और पंजाब की राजनीति की गहरी समझ रखने वाले तरुण चुग अब राज्यसभा में पंजाब के विकास, सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा, ठप पड़े उद्योगों और युवाओं के पलायन जैसे गंभीर मुद्दों को बेहद आक्रामक ढंग से उठाएंगे।
क्या पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की बढ़ेगी टेंशन?
बीजेपी का यह नया प्रयोग और तरुण चुग का राष्ट्रीय कद निश्चित रूप से सूबे की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है। पंजाब में अब तक बीजेपी को शहरी और सीमित दायरे की पार्टी माना जाता रहा है, लेकिन तरुण चुग जैसे जमीनी नेता को आगे रखकर पार्टी अब राज्य के हर वर्ग और खासकर हिंदू मतदाताओं को एकजुट करने की रणनीति पर काम कर रही है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी का यह 'अमृतसर टू मध्य प्रदेश' वाला सियासी रूट पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव में कितनी बड़ी कामयाबी की पटकथा लिख पाता है।