मनरेगा मजदूरों के मुद्दे पर बोले राहुल, कही ये चौंकाने वाली बात

कोविड-19 महामारी को लेकर सरकार द्वारा लिए गए लॉकडाउन के फैसले को कांग्रेस नेता आज भी गलत ठहराने में लगे हैं।

कोविड-19 महामारी को लेकर सरकार द्वारा लिए गए लॉकडाउन के फैसले को कांग्रेस नेता आज भी गलत ठहराने में लगे हैं। इस क्रम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि मोदी सरकार के इस तुगलकी फरमान के बाद लोगों की आजीविका का एकमात्र साधन मनरेगा रहा, लेकिन अब सरकार ने उससे हुई कमाई को बैंक से निकालने पर भी अपनी नजर टेढ़ी कर ली है। ऐसे में तमाम गरीब मजदूरों को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़े रहे हैं। मोदी सरकार सिर्फ गरीबों का अधिकार कुचलने में लगी है।
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राहुल गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, ‘पहले किया तुग़लकी लॉकडाउन, करोड़ों मज़दूरों को सड़क पर ले आए। फिर उनके एकमात्र सहारे मनरेगा की कमाई को बैंक से निकालना दूभर किया। सिर्फ़ बातों की है मोदी सरकार, कुचल रही ग़रीबों के अधिकार।’

अपने ट्वीट के साथ राहुल गांधी ने एक खबर भी साझा की है, जिसमें कहा गया है कि मनरेगा मजदूरों को अपनी ही दिहाड़ी निकालने को लगाने पड़ते हैं बैंकों के चक्कर। सर्वे के मुताबिक एक मजदूर को पोस्ट ऑफिस जाने का एक बार का खर्च छह रुपये तक आता है। जबकि बैंक विजिट पर 31 रुपया और एटीएम तक जाने और कैश निकालने के लिए उन्हें 67 रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
दरअसल, लिब टेक इंडिया की ओर से किए गए सर्वे के बाद जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा के तहत महज 202 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों को अपनी रकम को निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 45 फीसदी मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें अपनी दिहाड़ी की रकम निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इनमें से 40 फीसदी मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें बायोमीट्रिक डिटेल्स मैच न करने के चलते कई बार बैंक और डाकघर से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

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