सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में गई 300 करोड़ की फाइल, नेताओं की लड़ाई में बर्बाद हो गए गरीबों के 4,000 घर

सरकार बदलते ही ठंडे बस्ते में गई 300 करोड़ की फाइल, नेताओं की लड़ाई में बर्बाद हो गए गरीबों के 4,000 घर

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गरीबों को पक्का आशियाना देने की सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना आज प्रशासनिक लापरवाही और सियासी खींचतान के कारण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। सन् 2009 में समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए करीब 300 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से लगभग 4,000 किफायती आवासों का निर्माण कराया गया था। मगर समय पर फैसला न होने की वजह से करोड़ों की लागत से खड़ी की गई यह गगनचुंबी इमारतें आज किसी डरावने खंडहर जैसी नजर आ रही हैं।

सरकार बदली और ठंडे बस्ते में चली गई योजना

इस पूरी बर्बादी की कहानी साल 2013 से शुरू होती है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद जब इन घरों को जरूरतमंदों को आवंटित करने की बारी आई, तब तक प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का समय आ गया। साल 2013 में सरकार बदलने से ठीक पहले तक इन नवनिर्मित आवासों का वितरण नहीं किया जा सका था। इसके बाद आई नई सरकार के कार्यकाल में यह पूरी फाइल और योजना प्रशासनिक फाइलों में दबकर वर्षों तक ठंडे बस्ते में पड़ी रही।

रखवाली के अभाव में चोरों ने उखाड़ दी खिड़की, दरवाजे और सरिया

जब यह पूरी आवासीय कॉलोनी लावारिस हालत में छोड़ दी गई, तो यह असामाजिक तत्वों और चोरों का गढ़ बन गई। सुरक्षा और रखवाली का कोई इंतजाम न होने के कारण चोरों ने धीरे-धीरे पूरे परिसर को खोखला कर दिया। उपद्रवी इन घरों में लगी लोहे और एल्युमिनियम की खिड़कियां, महंगे लकड़ी के दरवाजे, बिजली के तार, पानी के नल और यहां तक कि दीवारों को तोड़कर उसके अंदर का सरिया तक उखाड़कर ले गए।

खंडहर के बदले 2.25 लाख देने को तैयार नहीं लाभार्थी

वक्त का पहिया घूमा और जब राज्य में दोबारा गहलोत सरकार सत्ता में लौटी, तब जाकर इस ठप पड़ी योजना की सुध ली गई। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सालों से वीरान पड़े यह घर पूरी तरह जर्जर और खंडहर का रूप ले चुके थे। प्रशासन ने जब चिन्हित लाभार्थियों को इन फ्लैट्स पर कब्जा लेने के लिए बुलाया, तो उन्होंने सीधे मना कर दिया। गरीबों का साफ कहना है कि इस जर्जर और असुरक्षित हो चुके ढांचे के लिए वे अपनी गाढ़ी कमाई के 2.25 लाख रुपये (निर्धारित लाभार्थी अंशदान) किसी भी कीमत पर नहीं चुकाएंगे।