चुनाव के ऐलान से पहले ही बीजेपी का 'मिशन पंचायत': राजस्थान में टॉप नेताओं ने संभाला मोर्चा

चुनाव के ऐलान से पहले ही बीजेपी का 'मिशन पंचायत': राजस्थान में टॉप नेताओं ने संभाला मोर्चा

राजस्थान की राजनीतिक जमीन पर शहरी निकाय चुनावों के ठीक बाद अब ग्रामीण सरकारों यानी पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों को लेकर सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ चुका है। राज्य में औपचारिक चुनाव आयोग की घोषणा से पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरी तरह से अलर्ट मोड में आते हुए अपनी चुनावी कमर कस ली है। पार्टी संगठन ने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत और अजेय बनाने के लिए एक बेहद आक्रामक रणनीति तैयार की है, जिसके तहत पार्टी के शीर्ष और दिग्ग्ज नेताओं को मैदान में उतार दिया गया है। तय किए गए विशेष प्रवास कार्यक्रमों के मुताबिक, बीजेपी के प्रमुख नेता महज तीन दिनों के भीतर प्रदेश के 25 से अधिक जिलों को नापेंगे और ताबड़तोड़ बैठकें कर कार्यकर्ताओं में जोश भरेंगे। राजनीतिक गलियारों में इस रणनीतिक कदम की चर्चा जोरों पर है, क्योंकि एक तरफ जहां सत्ताधारी दल ने समय रहते चुनावी मैदान में अपनी फौज उतार दी है, वहीं विपक्षी खेमे में अभी भी इस स्तर की संगठनात्मक हलचल देखने को नहीं मिल रही है।

मिशन पंचायती राज के तहत बीजेपी का मेगा प्लान: तीन दिनों में जिलों के दौरे पर रहेंगे पार्टी के शीर्ष दिग्गज नेता

भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ग्रामीण चुनावों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं। इस व्यापक 'मिशन पंचायती राज' अभियान के तहत पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश प्रभारियों और संगठन के वरिष्ठ महामंत्रियों को अलग-अलग संभागों और जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार, प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महामंत्री लगातार विभिन्न जिलों के दौरे पर रहेंगे और जिला भाजपा कार्यालयों में मैराथन बैठकें करेंगे। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना, राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना और स्थानीय स्तर पर सांगठनिक एकजुटता को परखना है। पार्टी के इस सुनियोजित और चरणबद्ध दौरे से यह साफ जाहिर होता है कि बीजेपी हर हाल में ग्रामीण इलाकों की सत्ता पर अपना परचम लहराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

ग्रामीण सरकारों पर कब्जा जमाने की पुरजोर कोशिश: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में धरातल पर उतरेगी सत्ता और संगठन की ताकत

राज्य में हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश नेतृत्व ने पंचायती राज चुनावों को लेकर पूरी ताकत झोंक दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों के बाद अब ग्रामीण मतदाता किसी भी दल की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं, यही वजह है कि चुनाव तारीखों के ऐलान का इंतजार किए बिना ही बीजेपी ने अपने सुपर-फाइव नेताओं को सीधे जिलों में कैंप करने के लिए भेज दिया है। इन दौरों के दौरान स्थानीय स्तर पर आ रही समस्याओं, पार्टी के भीतर तालमेल और आगामी चुनावी टिकट वितरण से जुड़ी रणनीतिक तैयारियों की सीधी मॉनिटरिंग शीर्ष नेतृत्व द्वारा की जा रही है। बहरहाल, राजस्थान की राजनीति का यह नया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि आने वाले पंचायत चुनाव बेहद रोमांचक और कांटे की टक्कर वाले होने वाले हैं, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।