कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश पर हुए चुनाव में कांग्रेस की विनीता पूनिया ने भाजपा को दी करारी मात

कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश पर हुए चुनाव में कांग्रेस की विनीता पूनिया ने भाजपा को दी करारी मात

राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल और आस्था के बड़े केंद्र खाटूश्यामजी की नगर पालिका में राजनीति का एक ऐसा रोमांचक और नाटकीय अध्याय देखने को मिला, जिसने पूरे प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा दिया। यहाँ नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान हाई-वोल्टेज ड्रामा, कानूनी दांवपेंच और अंत में एक सिंगल वोट के चमत्कार ने पूरा खेल ही पलट कर रख दिया। कांग्रेस उम्मीदवार विनीता पूनिया ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रत्याशी को बेहद रोमांचक मुकाबले में महज एक वोट के अंतर से पटखनी देते हुए नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। इस अप्रत्याशित जीत के बाद से ही कांग्रेस खेमे में जहां जश्न का माहौल है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव की चर्चा हर तरफ हो रही है कि कैसे एक अदद वोट और अदालत के एक फैसले ने बाजी पूरी तरह से पलट दी।

क्या था खाटूश्यामजी का वह 8-8 का कांटे का मुकाबला और क्यों फंसा था पेंच

खाटूश्यामजी नगर पालिका के कुल 20 सदस्यीय बोर्ड के चुनाव परिणामों में राजनीतिक दलों की स्थिति ने ही इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया था। यहाँ भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास ही 8-8 पार्षद जीतकर आए थे, जबकि 3 निर्दलीय और 1 आरएलपी (RLP) का पार्षद भी मैदान में था। अध्यक्ष पद की कुर्सी हासिल करने के लिए जादुई बहुमत का आंकड़ा 11 वोटों का था, जिसके चलते दोनों ही दल जोड़-तोड़ और रणनीतिक समीकरण बिठाने में जुटे हुए थे। भाजपा की तरफ से प्रेम देवी और कांग्रेस की तरफ से विनीता पूनिया को मैदान में उतारा गया था। जब 21 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पूरा सियासी घटनाक्रम अचानक एक अजीब मोड़ पर आ गया, क्योंकि कांग्रेस की एक महिला पार्षद मतदान केंद्र पर नहीं पहुंच सकीं और इसके बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा था।

लापता पार्षद का रहस्य, अपहरण के आरोप और सड़क पर हाई-वोल्टेज सियासी ड्रामा

मतदान के दिन वार्ड नंबर 10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी के अचानक गायब हो जाने से प्रशासन और राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया था। स्थिति तब और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई जब पार्षद के पति ने पुलिस थाने में पहुंचकर लिखित शिकायत दी और एक स्थानीय राजनीतिक व्यक्ति पर अपहरण का गंभीर आरोप जड़ दिया। इस खुलासे के बाद भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और थाने व नगर पालिका के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन व नारेबाजी शुरू हो गई। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटों में पार्षद को ढूंढ निकाला और अपने कब्जे में ले लिया, लेकिन तब तक मतदान का मामला पूरी तरह उलझ चुका था और चुनाव प्रक्रिया पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। दोनों पार्टियां इस एक वोट के अधिकार को लेकर अपनी-अपनी दलीलों के साथ प्रशासनिक और कानूनी दरवाजों पर पहुंच गईं।

राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और मतपेटी से निकला कांग्रेस की जीत का पैगाम

मामला जब तूल पकड़ गया तो राजस्थान उच्च न्यायालय (High Court) की जयपुर पीठ ने इस पूरे विवाद में हस्तक्षेप करते हुए एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया। कोर्ट ने पुनर्मतदान की अटकलों और आशंकाओं को खारिज करते हुए यह आदेश दिया कि 21 सितंबर को मतदान के दौरान जो 19 मत डाले जा चुके हैं, उन्हीं की निष्पक्ष गिनती करके परिणाम घोषित किया जाए। अदालत के इस कड़े और स्पष्ट निर्देश के बाद जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रांग रूम से सीलबंद मतपेटी बाहर निकाली। शनिवार सुबह निर्धारित समय पर भारी पुलिस जाप्ता और प्रत्याशियों की मौजूदगी में जब मतों की गिनती शुरू हुई, तो आंकड़ों ने सबको चौंका दिया। कुल 19 पड़े वैध वोटों में से कांग्रेस की विनीता पूनिया के पक्ष में 10 वोट पड़े, जबकि भाजपा की प्रेम देवी को 9 वोट हासिल हुए। इस तरह मात्र एक वोट के अंतर से जीत दर्ज कर विनीता पूनिया ने खाटूश्यामजी की नई चेयरमैन की कुर्सी अपने नाम कर ली।