राजस्थान में किसानों का यहां बड़ा ऐलान, ‘पानी नहीं तो चुनाव नहीं’ से मचा हड़कंप

राजस्थान में किसानों का यहां बड़ा ऐलान, ‘पानी नहीं तो चुनाव नहीं’ से मचा हड़कंप

राजस्थान में एक तरफ पंचायती राज इलेक्शनों का बिगुल बज चुका है, वहीं दूसरी ओर श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ शहर के घड़साना क्षेत्र में सिंचाई पानी का गंभीर संकट बारूद की तरह सुलग उठा है।

पानी की भारी किल्लत से आक्रोशित किसानों के आंदोलन का सीधा असर अब प्रशासनिक व्यवस्था और आगामी चुनावी प्रक्रियाओं पर पड़ना शुरू हो गया है।

घड़साना क्षेत्र में एसडीएम कार्यालय के बाहर किसानों का महापड़ाव गुरुवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारी किसानों ने पतरोड़ा में नेशनल हाईवे (NH-911) पर पूर्ण चक्का जाम कर यातायात ठप कर दिया। सड़क पर उतरे किसानों ने वर्ष 2004, 2005 और 2006 के ऐतिहासिक जल आंदोलनों का हवाला देते हुए सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह चिंगारी पूरे प्रदेश में फैलेगी।

चुनाव प्रक्रिया पर ब्रेक: 'पानी नहीं तो चुनाव नहीं' का सीधा ऐलान

गुरुवार को घड़साना पंचायत समिति परिसर में जब वार्डों के आरक्षण के लिए लॉटरी निकालने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही थी, तभी 'खेत बचाओ किसान बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले सैकड़ों आक्रोशित किसानों ने वहां धावा बोल दिया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए चुनावी लॉटरी प्रक्रिया का पूरी तरह बहिष्कार किया और उसे बीच में ही रुकवा दिया। आंदोलन कर रहे किसानों का दो-टूक कहना है कि जब तक खेतों को उनका हक का पानी नहीं मिल जाता, तब तक क्षेत्र में किसी भी कीमत पर चुनाव नहीं होने दिए जाएंगे।

आधी रात को प्रशासनिक सर्जरी: चीफ इंजीनियर रस्तोगी पर गिरी गाज

किसानों के सख्त तेवर और बुधवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बेनतीजा रही वार्ता के बाद शासन को बड़ा कदम उठाना पड़ा। किसानों के भारी दबाव के चलते सरकार ने देर रात एक्शन लेते हुए जल संसाधन विभाग हनुमानगढ़ के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी को पद से हटा दिया। सरकार ने तत्काल प्रभाव से अरुण कुमार सिडाना को नया मुख्य अभियंता नियुक्त कर दिया है। हालांकि, किसानों ने साफ कर दिया है कि केवल अधिकारियों की अदला-बदली से आंदोलन खत्म नहीं होगा, जब तक कि उनकी जमीनी मांगें स्वीकार नहीं की जातीं।

किसानों की 4 प्रमुख शर्तें, जिन पर अड़ा है आंदोलन

किसानों ने स्पष्ट किया है कि महापड़ाव तभी समाप्त होगा जब उनकी चार मुख्य मांगों पर ठोस फैसला लिया जाएगा:

  • अनूपगढ़ शाखा के लिए सिंचाई पानी का निर्धारित कोटा आरक्षित किया जाए।

  • चार में से दो ग्रुप प्रणाली के आधार पर 6 महीने का सुचारू रेग्युलेशन तत्काल लागू हो।

  • पानी के अभाव में तबाह हुई खरीफ फसलों की विशेष गिरदावरी करवाई जाए।

  • प्रभावित किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत उचित मुआवजा दिलाया जाए।