गजब सियासी उलटफेर: यहां AAP के सहारे बनी BJP की सरकार

गजब सियासी उलटफेर: यहां AAP के सहारे बनी BJP की सरकार

दिल्ली से लेकर पंजाब तक एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जाने वाले आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच किसी चुनावी तालमेल की कल्पना भी नहीं की जा सकती, लेकिन राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव में ऐसा अप्रत्याशित सियासी खेल हुआ जिसने सभी राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है।

राजधानी जयपुर से लगभग 380 किलोमीटर दूर झालावाड़ जिले की पिड़ावा नगरपालिका में भाजपा ने आम आदमी पार्टी के पार्षदों के समर्थन से अपना बोर्ड बना लिया। 20 वार्डों वाली इस नगरपालिका में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन आखिरी वक्त पर वोटों के अंकगणित ने बाजी पलट दी और कांग्रेस हाथ मलती रह गई।

पिड़ावा में कैसे हुआ यह अप्रत्याशित सियासी खेल

पिड़ावा नगरपालिका के 20 वार्डों के चुनावी नतीजों में कांग्रेस ने सर्वाधिक 8 सीटें जीतकर मजबूत बढ़त बनाई थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को 6 वार्डों में जीत मिली थी। वहीं आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर कब्जा जमाया और 1 सीट निर्दलीय के खाते में गई। सोमवार को जब चेयरमैन के चुनाव की घड़ी आई, तो कयास लगाए जा रहे थे कि सबसे बड़ा दल होने के नाते कांग्रेस जरूरी 3 वोटों की भरपाई कर लेगी। लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा प्रत्याशी राजू माली ने चौंकाते हुए 'आप' के सभी 5 पार्षदों और 1 निर्दलीय का समर्थन हासिल कर लिया और 4 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर पिड़ावा में भाजपा की लोकल सरकार बना दी।

टिकट कलह का फायदा: कांग्रेस से 'आप' में गए नेताओं ने दिया BJP का साथ

पिड़ावा में सामने आए इस अनोखे गठजोड़ की जड़ें निकाय चुनाव के टिकट वितरण से जुड़ी हुई हैं। चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर जोरदार बगावत हुई थी, जिससे नाराज होकर कई कद्दावर नेता और बागी कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतर गए थे। इनमें से पांच नेता चुनाव जीतकर पार्षद बनने में सफल रहे। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि विचारधारा के स्तर पर ये बागी पार्षद चेयरमैन चुनाव में कांग्रेस का समर्थन कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने पुरानी तल्खी के चलते भाजपा प्रत्याशी को वोट देना ज्यादा मुफीद समझा और कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया।

बारां में 'आप' का पहला सभापति, राजस्थान में दर्ज की ऐतिहासिक दस्तक

राजस्थान के कुल 309 निकायों में संपन्न हुए चुनावों में आम आदमी पार्टी ने राज्य के कई हिस्सों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। बारां नगर परिषद में पार्टी ने सबसे बड़ा उलटफेर करते हुए ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जहां बहुमत के आंकड़े को छूने के बाद शीतल राठौर सभापति निर्वाचित हुईं। इसके साथ ही राजस्थान के इतिहास में पहली बार किसी शहरी निकाय में आम आदमी पार्टी का आधिकारिक बोर्ड और सभापति बना है, जिससे राज्य में पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर है।

'बी-टीम' के आरोपों पर भिड़ी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी

पिड़ावा और बारां के इन घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। अरविंद केजरीवाल ने जब पाली निकाय चुनाव में कांग्रेस पार्षदों की क्रॉस-वोटिंग से भाजपा को मिली जीत पर तंज कसा, तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने तीखा पलटवार किया। खेड़ा ने एक्स पर लिखा कि राजस्थान में भाजपा और आम आदमी पार्टी की अंदरूनी मिलीभगत पूरी तरह बेनकाब हो गई है और कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने के लिए 'आप' भाजपा की 'बी-टीम' बनकर काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिड़ावा में सबसे ज्यादा सीटें होने के बावजूद 'आप' की मदद से भाजपा का बोर्ड बना, जो दोनों दलों की सांठगांठ को प्रमाणित करता है।