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मंत्रियों के नाम पर सस्पेंस, क्या महिला चेहरे पर दांव खेलकर सबको चौंकाएगा आलाकमान

राजस्थान की सियासत में राज्यसभा चुनाव का रोमांच खत्म होने के तुरंत बाद अब एक और बड़े सियासी महासंग्राम की बिसात बिछ चुकी है। प्रदेश में सोशल इंजीनियरिंग और राजनीतिक संतुलन साधने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर अगला सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि मदन राठौड़ के बाद संगठन का नया सूबेदार कौन होगा? इस पद को लेकर जयपुर से लेकर दिल्ली के गलियारों तक सुगबुगाहट अपने चरम पर पहुंच गई है। कयासों के बाजार में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब यह चर्चा आम हुई कि पार्टी इस बार मरुधरा में किसी महिला चेहरे को कमान सौंपकर एक नया और बड़ा राजनीतिक नैरेटिव सेट कर सकती है। सूत्रों की मानें तो केंद्रीय नेतृत्व ने इस संबंध में अपनी रणनीति का खाका तैयार कर लिया है, लेकिन अंतिम मुहर लगने में अभी दो हफ्ते का समय और लग सकता है।

राज्यसभा चुनाव से तय हुई संगठन के नए 'कमांडर' की पटकथा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन महज उच्च सदन की सीटें भरने तक सीमित नहीं था। इसके जरिए भाजपा ने आगामी स्थानीय निकाय और भविष्य के चुनावों के लिए एक मजबूत पृष्ठभूमि तैयार की है। राज्यसभा के टिकटों में जिस तरह से जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधा गया है, उसकी अगली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अब नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति होने वाली है। साफ है कि पार्टी आलाकमान जिसे भी राजस्थान बीजेपी का नया कप्तान बनाएगा, उसके कंधों पर संगठन को एकजुट रखने और आगामी चुनावी जंग में फतह हासिल करने की सीधी जिम्मेदारी होगी।

मंत्रियों के नाम पर चर्चा हुई धीमी, पर 'सरप्राइज' के विकल्प अभी भी खुले

पिछले कुछ दिनों से जयपुर के सियासी हलकों में यह अफवाह बेहद गर्म थी कि भजनलाल सरकार के ही किसी कद्दावर और प्रभावशाली मंत्री को संगठन की कमान सौंपी जा सकती है। इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा था कि इससे सरकार और संगठन के बीच बेहतर और मजबूत तालमेल रहेगा। हालांकि सूत्रों का दावा है कि इस फॉर्मूले की भनक लगते ही पार्टी के भीतर जिस तरह की अंदरूनी सक्रियता और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, उसके बाद यह योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। इसके बावजूद राजनीति के जानकार इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर रहे हैं, क्योंकि जेपी नड्डा और अमित शाह की जोड़ी अंतिम समय तक अपने 'सरप्राइज एलिमेंट' के लिए जानी जाती है।

क्या आधी आबादी पर दांव खेलकर इतिहास रचेगी भाजपा?

इस पूरे सियासी घटनाक्रम के बीच सबसे चौंकाने वाला संकेत 'महिला नेतृत्व' को लेकर मिल रहा है। अंदरखाने यह चर्चा बेहद तेज है कि भाजपा राजस्थान में महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने की तैयारी में है। अगर ऐसा होता है, तो राजस्थान भाजपा के इतिहास में यह एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। महिला प्रदेशाध्यक्ष बनाने के पीछे पार्टी की दोतरफा रणनीति साफ नजर आती है। पहला, साइलेंट वोटर मानी जाने वाली महिला वोट बैंक पर अपनी पकड़ को अभेद्य बनाना और दूसरा, विपक्ष के पारंपरिक जातीय समीकरणों को पूरी तरह ध्वस्त करना।

अभी दो हफ्ते और चलेगा सस्पेंस, दिल्ली में लॉबिंग हुई तेज

दिल्ली में बैठे भाजपा आलाकमान की कार्यशैली को देखते हुए फिलहाल किसी भी एक नाम पर अंतिम मुहर का दावा करना जल्दबाजी होगी। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुट अपने पसंदीदा नेताओं के पक्ष में माहौल बनाने और लॉबिंग करने में जुटे हुए हैं। संकेत मिल रहे हैं कि राजस्थान भाजपा को उसका नया मुखिया मिलने में अभी कम से कम दो सप्ताह का समय और लग सकता है। तब तक दावेदारों की दिल्ली दौड़ और समर्थकों की सोशल मीडिया पर दावेदारी का दौर यूं ही परवान चढ़ता रहेगा। राज्यसभा का पड़ाव भले ही पार हो चुका हो, लेकिन राजस्थान भाजपा के इस अगले 'महाफैसले' पर पूरे सूबे की निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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