कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ? जो बनने जा रहे देश के मुख्य न्यायाधीश

कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ? जो बनने जा रहे देश के मुख्य न्यायाधीश

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के सर्वोच्च न्यायालय के प्रख्यात और वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ आने वाले समय में देश के अगले मुख्य न्यायाधीश (CJI) बनने की कतार में हैं। उनकी कानूनी सूझबूझ, पारदर्शिता और न्यायिक सुधारों की दिशा में किए गए ऐतिहासिक कार्यों ने उन्हें देश भर में एक अलग पहचान दिलाई है। उनके व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और शैक्षणिक उपलब्धियों को लेकर भी लोगों में भारी उत्सुकता बनी रहती है। खासकर उनकी धर्मपत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव के इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर होने के कारण यह परिवार शैक्षणिक और न्यायिक दोनों ही क्षेत्रों में देश भर में चर्चा का केंद्र बना रहता है। आइए विस्तार से जानते हैं जस्टिस विक्रम नाथ के अब तक के शानदार सफर, उनके परिवार और उनके ऐतिहासिक योगदान के बारे में।

कौन हैं जस्टिस विक्रम नाथ और उनका शुरुआती जीवन व पारिवारिक पृष्ठभूमि

जस्टिस विक्रम नाथ का जन्म 24 सितंबर 1962 को उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। वे एक ऐसे परिवार से ताल्लुक रखते हैं जिसका कानून के क्षेत्र से गहरा नाता रहा है। वे अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं जिन्होंने वकालत और न्याय के क्षेत्र को अपनाया है। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा और लालन-पालन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में ही हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद विज्ञान वर्ग से स्नातक (बीएससी) की डिग्री वर्ष 1983 में हासिल की। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध लखनऊ विश्वविद्यालय से वर्ष 1986 में कानून (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की। अपने परिवार की समृद्ध कानूनी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बहुत कम उम्र में ही वकालत की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था, जिसका लाभ उन्हें अपने पूरे करियर के दौरान मिला।

वकालत से लेकर उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट तक का शानदार सफर

कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद जस्टिस विक्रम नाथ ने 30 मार्च 1987 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में एक वकील के रूप में अपना पंजीकरण कराया था। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लगातार 17 वर्षों से अधिक समय तक वकालत की और दीवानी तथा संवैधानिक मामलों में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उनकी बेहतरीन कार्यशैली और कानूनी ज्ञान को देखते हुए 24 सितंबर 2004 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और फरवरी 2006 में वे स्थायी जज बन गए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लगभग 15 वर्षों तक सेवा देने के बाद, 10 सितंबर 2019 को उन्हें गुजरात उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके पश्चात, 31 अगस्त 2021 को उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। उनकी वरिष्ठता और नियमों के अनुसार, वे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश के पद को सुशोभित करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

तकनीकी पारदर्शिता और अदालती कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग के हैं जनक

जस्टिस विक्रम नाथ के करियर का सबसे क्रांतिकारी और यादगार कदम गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उठाया गया था। कोविड-19 महामारी के दौर में जब अदालतों के दरवाजे आम जनता और वकीलों के लिए भौतिक रूप से बंद हो गए थे, तब उन्होंने अदालती कार्रवाइयों की लाइव-स्ट्रीमिंग शुरू करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। वे भारत के किसी भी उच्च न्यायालय के ऐसे पहले मुख्य न्यायाधीश बने जिन्होंने पारदर्शिता और जनसामान्य की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए यूट्यूब और अन्य माध्यमों से कोर्ट की कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू किया। उनके इस कदम की देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सराहना हुई। इसके अलावा, वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट की ई-कमिटी के चेयरपर्सन के रूप में भारतीय न्यायपालिका में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की कमान संभाल रहे हैं।

धर्मपत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव हैं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठित वाइस चांसलर

जस्टिस विक्रम नाथ के परिवार की बात करें तो उनकी पत्नी प्रोफेसर संगीता श्रीवास्तव भी देश की जानी-मानी शिक्षाविद और प्रशासनिक महिला लीडर हैं। प्रो. संगीता श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उन्हें हाल ही में इस प्रतिष्ठित संस्थान के इतिहास में पहली महिला वाइस चांसलर के रूप में लगातार दूसरा कार्यकाल मिला है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान और प्रशासनिक दृढ़ता के चलते विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण मुकाम हासिल किए हैं। एक तरफ जहां जस्टिस विक्रम नाथ भारतीय न्यायपालिका के सर्वोच्च शिखर की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पत्नी प्रो. संगीता श्रीवास्तव उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही हैं। यह दंपत्ति अपने-अपने क्षेत्रों में देश के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बना हुआ है।