Kamika Ekadashi 2026: पीरियड्स के दौरान एकादशी व्रत रखना चाहिए या छोड़ दें? जानें महिलाओं के लिए क्या हैं सही नियम

Kamika Ekadashi 2026: पीरियड्स के दौरान एकादशी व्रत रखना चाहिए या छोड़ दें? जानें महिलाओं के लिए क्या हैं सही नियम

सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत अधिक धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित इस पवित्र दिन पर देश भर के करोड़ों श्रद्धालु व्रत रखते हैं। लेकिन अक्सर महिलाओं के मन में यह बड़ा असमंजस और सवाल रहता है कि यदि व्रत के दौरान या व्रत के ठीक पहले पीरियड्स (मासिक धर्म) आ जाएं, तो उन्हें क्या करना चाहिए? क्या ऐसी स्थिति में व्रत रखा जा सकता है या इसे छोड़ देना चाहिए? आइए जानते हैं शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं के लिए एकादशी व्रत से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां।

क्या पीरियड्स के दौरान रखा जा सकता है एकादशी का व्रत?

शास्त्रों और धर्म जानकारों के अनुसार, इस सवाल का जवाब 'हाँ' है। महिलाएं मासिक धर्म या पीरियड्स के दौरान भी एकादशी का व्रत रख सकती हैं। व्रत का संबंध मुख्य रूप से आपके मन की श्रद्धा, उपवास यानी खान-पान के संयम और भगवान के प्रति समर्पण से होता है। शारीरिक अशुद्धि के कारण व्रत रखने या भूखे रहने पर किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं लगाई गई है। यदि आपकी सेहत पूरी तरह ठीक है और आप उपवास करने में सक्षम हैं, तो आप फलाहार या जल ग्रहण करके आसानी से व्रत का पालन कर सकती हैं।

पीरियड्स के दौरान व्रत रखते समय किन नियमों का रखें ध्यान?

यदि आप मासिक धर्म की स्थिति में एकादशी का व्रत रख रही हैं, तो कुछ खास धार्मिक और शारीरिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है। इस दौरान आपको घर के मंदिर के अंदर प्रवेश करने से बचना चाहिए और भगवान की मूर्तियों या पूजन सामग्री को प्रत्यक्ष रूप से बिल्कुल नहीं छूना चाहिए। आप खुद बैठकर विधि-विधान से पूजा या आरती करने के बजाय दूर बैठकर ही भगवान विष्णु का मानसिक स्मरण कर सकती हैं। भगवान के मंत्रों का मानसिक जाप या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ आप मोबाइल या पुस्तक देखकर आसानी से कर सकती हैं। इसके अलावा भगवान के लिए भोग अपने हाथों से न बनाएं और न ही तुलसी के पत्तों को स्पर्श करें, यह काम घर के किसी अन्य सदस्य से करवाएं।

व्रत के बीच में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें?

कई बार ऐसा होता है कि महिलाएं व्रत का संकल्प ले लेती हैं और व्रत के दिन ही या बीच में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में आपको अपना व्रत बीच में बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहिए। अपने उपवास को पूरी निष्ठा के साथ नियमपूर्वक पूरा करें। बस इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आगे की बाहरी पूजा-पाठ, आरती और भोग लगाने की जिम्मेदारी घर के किसी अन्य सदस्य को सौंप दें और स्वयं विश्राम करते हुए मानसिक रूप से भगवान का ध्यान करें।

एकादशी व्रत का पारण करते समय किन बातों का रखें ख्याल?

एकादशी व्रत का समापन यानी पारण अगले दिन द्वादशी तिथि पर शुभ मुहूर्त में किया जाता है। पीरियड्स के दौरान पारण करते समय भी मूर्ति को स्पर्श करने से बचना चाहिए। यदि संभव हो तो घर के किसी अन्य सदस्य से तुलसी दल और चरणामृत लेकर पारण कर लें, या फिर मानसिक रूप से भगवान विष्णु का ध्यान करके अन्न या जल ग्रहण कर अपने व्रत का सफलतापूर्वक पारण करें। धर्म के जानकारों का मानना है कि यदि आप पूरी श्रद्धा, पवित्र मन और साफ नीयत के साथ नियमों का पालन करते हुए व्रत रखती हैं, तो अशुद्धि की स्थिति में भी आपको व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

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