करियर खत्म होने की चोट से उबरकर यास्तिका भाटिया ने जड़ा ऐतिहासिक टेस्ट शतक, ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं

करियर खत्म होने की चोट से उबरकर यास्तिका भाटिया ने जड़ा ऐतिहासिक टेस्ट शतक, ऐसा करने वाली पहली महिला बनीं

भारतीय महिला क्रिकेट की स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर वो कारनामा कर दिखाया है, जो क्रिकेट के इतिहास में आज तक कोई महिला खिलाड़ी नहीं कर सकी। पिछले साल करियर को खतरे में डालने वाली घुटने की गंभीर चोट (ACL) से उबरकर वापसी करने वाली यास्तिका ने इंग्लैंड के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में शानदार 113 रनों की पारी खेली। इसके साथ ही वह मक्का-ए-क्रिकेट कहे जाने वाले लॉर्ड्स स्टेडियम में टेस्ट शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद यास्तिका का मानना है कि उनका "सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अभी आना बाकी है।"

158 गेंदों में 113 रन: इंग्लैंड के सामने 457 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य

चल रहे एकमात्र टेस्ट मैच के तीसरे दिन चायकाल से ठीक पहले भारत ने अपनी दूसरी पारी घोषित की। इससे पहले यास्तिका भाटिया ने इंग्लैंड के गेंदबाजों की क्लास लगाते हुए 158 गेंदों में 113 रनों की बेजोड़ पारी खेली। यास्तिका के इस धांसू शतक की बदौलत भारतीय टीम ने दूसरी पारी में 341 रन बनाए और मेजबान इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रनों का एक असंभव सा दिखने वाला लक्ष्य रख दिया।

सम्मान सूची (Honours Board) में नाम दर्ज होने पर भावुक हुईं यास्तिका

अपनी इस चमत्कारी पारी और लॉर्ड्स के ऑनर्स बोर्ड पर नाम दर्ज कराने के बाद समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) से बात करते हुए यास्तिका भावुक हो गईं। उन्होंने कहा, "यह वाकई अविश्वसनीय है। छह महीने पहले मैं बिल्कुल अलग और बेहद मुश्किल स्थिति में थी। अगर उस वक्त किसी ने मुझसे कहा होता कि लॉर्ड्स के सम्मान बोर्ड पर मेरा नाम होगा, तो मैं शायद कभी इस पर विश्वास नहीं करती।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अभी तो और भी बेहतर होना बाकी है। यह तो बस एक शुरुआत है, आगे बहुत कुछ आना बाकी है और मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।"

जब छूट गया था घरेलू वनडे विश्व कप, परिवार और स्टाफ ने बढ़ाया हौसला

यास्तिका भाटिया ने अपनी इस शानदार वापसी का पूरा श्रेय अपने परिवार, टीम के साथियों और सपोर्ट स्टाफ को दिया। गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में उनके बाएं घुटने में गंभीर एसीएल (ACL) इंजरी हो गई थी, जिसके लिए उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी। इस चोट की वजह से वह भारत की धरती पर खेले गए महिला वनडे विश्व कप में हिस्सा नहीं ले पाई थीं, जिसमें भारतीय टीम विजेता बनी थी। यास्तिका ने कहा, "पर्दे के पीछे मेरे माता-पिता, मेरी बहन, मेरे कोच और रिहैबिलिटेशन सेंटर (COE) के स्टाफ ने दिन-रात मेहनत की। उनके बिना व्हीलचेयर से उठकर लॉर्ड्स में शतक बनाना नामुमकिन था।"

लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत के बेहद करीब टीम इंडिया

भारत इस समय लॉर्ड्स के मैदान पर अपनी पहली ऐतिहासिक टेस्ट जीत दर्ज करने के बेहद करीब है। पहली पारी में 285 रन बनाने के बाद भारत ने दूसरी पारी में दमदार खेल दिखाया। 457 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम दूसरी पारी में पूरी तरह लड़खड़ा गई है। मैच में दो दिन का खेल बाकी है और मेजबान टीम के सिर्फ 4 विकेट शेष बचे हैं।

आपको बता दें कि इस ऐतिहासिक मैच में भारत के लिए दोहरी खुशी आई। यास्तिका के शतक से ठीक पहले भारत की युवा तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 5 विकेट चटकाए थे। वह लॉर्ड्स टेस्ट सम्मान बोर्ड पर नाम दर्ज कराने वाली इतिहास की पहली महिला तेज गेंदबाज बनी थीं, और उसके तुरंत बाद यास्तिका ने शतक जड़कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया।

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