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Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की महत्वाकांक्षी और विवादास्पद टैरिफ नीति को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने ट्रंप द्वारा दुनिया भर के देशों से आयात होने वाले सामान पर लगाए गए आपातकालीन टैरिफ को अवैध करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब ट्रंप प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 133 अरब डॉलर (लगभग 11 लाख करोड़ रुपये) की भारी-भरकम राशि कंपनियों को वापस (Refund) करने की खड़ी हो गई है।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति को आपातकालीन कानूनों का सहारा लेकर मनमाने ढंग से टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है; यह अधिकार केवल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) के पास सुरक्षित है।

रिफंड की रेस: दिग्गज कंपनियों ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अमेरिका की बड़ी रिटेल और फूड कंपनियां सक्रिय हो गई हैं। कॉस्टको (Costco), रेव्लॉन (Revlon) और बम्बल बी फूड्स (Bumble Bee Foods) जैसी बड़ी कंपनियों ने रिफंड पाने के लिए पहले ही कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मुकदमों की बाढ़ आ सकती है, क्योंकि हर छोटी-बड़ी कंपनी अपना पैसा वापस चाहती है।

किसे मिलेगा पैसा और कितनी लंबी होगी प्रक्रिया?

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को अवैध बताया है, लेकिन रिफंड की राह इतनी आसान नहीं है। जानकारों के मुताबिक:

समय सीमा: रिफंड प्रक्रिया में 12 से 18 महीने या उससे भी अधिक का समय लग सकता है।

अथॉरिटी: यह पैसा अमेरिकी कस्टम विभाग और इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट के माध्यम से वापस किया जाएगा।

पुराना सिस्टम: ट्रेड वकीलों का कहना है कि सरकार उसी सिस्टम का उपयोग कर सकती है जिसका उपयोग 1990 के दशक में असंवैधानिक निर्यात शुल्क लौटाने के लिए किया गया था।

आम उपभोक्ताओं का क्या होगा?

एक बड़ा सवाल यह है कि क्या उन आम नागरिकों को पैसा मिलेगा जिन्होंने टैरिफ के कारण महंगी कीमतों पर सामान खरीदा? विशेषज्ञों के अनुसार इसकी संभावना बहुत कम है। कंपनियों ने टैरिफ का बोझ ग्राहकों पर डाल दिया था, लेकिन किसी व्यक्तिगत ग्राहक के लिए यह साबित करना लगभग असंभव होगा कि उसने किस खास उत्पाद पर कितना 'टैरिफ टैक्स' चुकाया है। हालांकि, इलिनॉय जैसे राज्यों के नेता अपने नागरिकों के लिए अरबों डॉलर के रिफंड की मांग कर रहे हैं।

इतिहास में पहली बार इतना बड़ा 'पे-बैक'

अमेरिकी इतिहास में यह पहली बार होगा जब सरकार को इतनी बड़ी राशि एक साथ लौटानी पड़ सकती है। हजारों आयातकों का डेटा प्रोसेस करना और अरबों डॉलर का भुगतान करना अमेरिकी कस्टम एजेंसी के लिए एक प्रशासनिक चुनौती होगी। ट्रंप ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि यह लड़ाई अभी लंबी चलेगी और वे इसे ऊपरी अदालतों में खींचेंगे।