Up kiran,Digital Desk : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हाल के क़दम और बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गए हैं। ट्रंप की विदेश नीति ने पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय ढांचे को चुनौती दी है और कई देश इसके प्रभाव से न केवल राजनीतिक स्तर पर बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी सतर्क हो गए हैं। आइए इसे सरल और स्पष्ट अंदाज़ में समझते हैं।
सबसे पहले ट्रंप ने मध्य पूर्व में तनाव बढ़ाया है, खासकर ईरान के साथ। ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन और धमकियों के बीच रूस ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर वाशिंगटन अपनी नीतियों को थोड़े जोर से लागू करेगा तो इसका गंभीर असर होगा।
ट्रंप की यह रणनीति कुछ विशेषज्ञों को “नए विश्व आदेश” की ओर एक कदम की तरह दिखती है, जिसमें अमेरिका अपनी सैन्य और कूटनीतिक शक्ति से वैश्विक संतुलन को फिर से अपनी दिशा देना चाहता है। ऐसे कार्यों में अमेरिका का सैन्य हस्तक्षेप, अपने सहयोगी और प्रतिद्वंद्वी देशों के साथ नीतियों में बदलाव शामिल हैं।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की विदेश नीति “अमेरिका फ़र्स्ट” से आगे बढ़कर एक ऐसे विश्व ढांचे की तरफ़ इशारा करती है, जिसमें अमेरिका अपनी ताक़त को अधिक प्राथमिकता दे रहा है और पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका को कमजोर कर रहा है।
वैश्विक स्तर पर इससे चिंता भी बढ़ी है कि क्या इस तरह की नीति तीसरे विश्व युद्ध जैसे बड़े संघर्ष की संभावनाओं को और करीब ला सकती है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में भी ट्रंप के बयान को विश्व युद्ध की संभावित चेतावनी के रूप में बताया गया है।
हालाँकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि वैश्विक भू-राजनीति अब कई बड़ी ताक़तों के बीच संतुलन की लड़ाई है और सिर्फ़ अमेरिका ही नहीं, रूस-चीन जैसे देश भी अपनी विश्व भूमिका का विस्तार कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि “नया विश्व आदेश” किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का परिणाम है।

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