Up kiran,Digital Desk : प्रभास और संजय दत्त की नई रिलीज़ फिल्म ‘द राजा साब’ 9 जनवरी, 2026 को सिनेमाघरों में आई है। इसे एक हॉरर‑कॉमेडी‑फैंटेसी फिल्म के रूप में पेश किया गया, लेकिन देखने के बाद रिव्यूज़ का जो रुख़ है, वह कुछ अलग ही लगता है।
फिल्म की कहानी सुनने में रोचक लग सकती है — राजा (प्रभास) अपनी दादी की उम्मीद पर चलकर एक रहस्यमयी हवेली तक पहुँचता है, जहां अंधविश्वास, आत्माएं और अतीत के राज़ जुड़ते हैं। लेकिन स्क्रीन पर यह कहानी उतनी मज़ेदार या दिलचस्प नहीं दिखी जितनी आइडिया के हिसाब से हो सकती थी।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि फिल्म खुद तय नहीं कर पाती कि वह क्या बनना चाहती है — कभी इमोशनल ड्रामा, कभी कॉमेडी, कभी हॉरर, और हर बार कंटेंट बिखर जाता है। इससे दर्शकों को न तो डर लगता है और न ही हँसी आती है। (
प्रभास ने जहाँ कोशिश की है अपने किरदार में जान डालने की, वहीं कमजोर स्क्रिप्ट के कारण वह पूरी तरह असर नहीं दिखा पाए। संजय दत्त का किरदार रहस्यपूर्ण और कुछ हद तक प्रभावशाली है, लेकिन बाकी कलाकारों के किरदार गाने या ग्लैमर तक सीमित रह जाते हैं।
तकनीकी तौर पर भी फिल्म थोड़ी कमजोर लगती है — बैकग्राउंड म्यूज़िक कहानी के साथ तालमेल नहीं बैठा पाता, और VFX का ज़रूरत से ज़्यादा उपयोग कई जगह फिल्म को थोड़े “टेलीविजन‑सरीखा” अनुभव देता है।
कुछ पल ऐसे भी हैं जो दिलचस्पी जगाते हैं — जैसे संजय दत्त के सीन और कुछ कॉमिक/इमोशनल क्षण — लेकिन वे पूरे अनुभव को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो बड़े बजट और बड़े नामों के बावजूद ‘द राजा साब’ एक मिस्ड ऑपर्च्युनिटी साबित होती है। अगर आप अलग‑सी कहानी, सच्चा हॉरर या सटीक कॉमेडी चाहते हैं, तो यह फिल्म शायद वह सब नहीं दे पाएगी।
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