Up kiran,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के करीब आने के साथ ही सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपनी चुनावी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कमान संभालते हुए उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी है। सूत्रों की मानें तो इस बार पार्टी 'नो रिस्क' की रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत कई बड़े मंत्रियों और अनुभवी विधायकों के चुनाव क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
कालीघाट में मैराथन बैठकें: 'सर्जरी' की तैयारी में टीएमसी
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर पिछले दो दिनों से बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों ने भाग लिया। चर्चा का मुख्य केंद्र इस बार 'एंटी-इंकंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) को मात देना है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी के इंटरनल सर्वे में जिन विधायकों की रिपोर्ट कार्ड कमजोर आई है, उनके टिकट कटने तय माने जा रहे हैं। वहीं, कुछ कद्दावर चेहरों को उनकी पारंपरिक सीटों के बजाय नए और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में उतारने की योजना है ताकि आसपास की सीटों पर भी उनका प्रभाव पड़े।
संगठन बनाम सरकार: अनुभव को नई जिम्मेदारी
ममता बनर्जी इस बार नए और पुराने चेहरों के बीच एक सटीक संतुलन बनाना चाहती हैं। विचार यह भी है कि जिन अनुभवी विधायकों को चुनावी मैदान से हटाया जाएगा, उन्हें घर बैठने के बजाय संगठन के अहम पदों पर तैनात किया जाएगा। इससे पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी और चुनाव के दौरान पुराने कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष को भी कम किया जा सकेगा।
ग्लैमर और युवाओं पर दांव: सेलिब्रिटीज को मिल सकता है मौका
टीएमसी की नई उम्मीदवार सूची में इस बार बड़े सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं। पार्टी नेतृत्व मीडिया, खेल और फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों के संपर्क में है। नए और गैर-राजनीतिक चेहरों को चुनावी समर में उतारकर ममता बनर्जी मतदाताओं को नयापन देना चाहती हैं। साथ ही, युवाओं को ज्यादा से ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर भी जोर दिया जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर भी सक्रिय हुई 'दीदी'
विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भी टीएमसी ने अपनी चालें चल दी हैं। पश्चिम बंगाल की पांच सीटों में से टीएमसी कम से कम चार पर अपनी जीत सुनिश्चित मान रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन चार में से तीन सीटें पार्टी के समर्पित नेताओं को मिलेंगी, जबकि एक सीट पर किसी ऐसे प्रभावशाली गैर-राजनीतिक व्यक्ति को मौका दिया जा सकता है, जिसकी दिल्ली के सत्ता के गलियारों में गहरी पैठ हो।




