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लखनऊ। देश और दुनिया में प्रख्यात साहित्यकार पद्मश्री डॉ. उषा किरण खान का रविवार को पटना के एक अस्पताल में निधन हो गया है। उसके निधन से हिंदी साहित्य जगत में शोक की लहर है। डॉ. उषा किरण खान ने हिंदी और मैथिली में कई चर्चित कृतियाँ लिखी। मैथिली उपन्यास भामती के लिये उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के सर्वोच्च साहित्य सम्मान भारत-भारती से नवाजा गया था।

डॉ. उषा किरण खान दरभंगा के लहेरियासराय की रमूल निवासी थी। पूर्व आईपीएस रामचंद्र खान उनके पति थे। डॉ. उषा किरण खान कुछ दिनों से थी अस्वस्थ चल रही थीं। उन्हें इलाज के लिए पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉ. उषा किरण खान  के निधन से हिंदी साहित्य जगत में कभी न खत्म होने वाला सन्नाटा पसर गया है।

डॉ. उषा किरण खान के लेखन में सबसे ज़्यादा गांव-घर आया है। उनका मानना था कि असली ज़िन्दगी की कहानी गांव के भीतर ही है। उन्होंने बच्चों पर लिखा, नाटक, कहानियां, उपन्यास, आलेख और संस्मरण लिखा। साहित्य की हर विधा में लिखा। उषा किरण खान की अब तक पचास से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें उपन्यास, कहानी, नाटक और बाल-साहित्य जैसी विविध विधाएँ सम्मिलित हैं। पानी पर लकीर, फागुन के बाद, रतनारे नयन, सीमान्त कथा, हसीना मंजिल, सिरजनहार, अनुत्तरित प्रश्न, हीरा डोम, भामती, सृजनहार, हसीना मंज़िल, घर से घर तक उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। 
 

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