लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर चला प्रशासन का बुलडोजर: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारी पुलिस बल तैनात

लखनऊ में वकीलों के अवैध चैंबरों पर चला प्रशासन का बुलडोजर: हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारी पुलिस बल तैनात

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को अवैध अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम ने एक बड़ा विध्वंस अभियान शुरू किया। कलेक्ट्रेट, सत्र न्यायालय, पुराने उच्च न्यायालय और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास वकीलों द्वारा अनधिकृत रूप से बनाए गए कक्षों को बुलडोजरों की मदद से ढहाया जाने लगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा जारी सख्त आदेशों के अनुपालन में की जा रही इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और भारी पुलिस बल तैनात रहा।

आधे दर्जन से अधिक बुलडोजर लेकर पहुंची नगर निगम की टीम

रविवार शाम करीब पांच बजे नगर निगम का दस्ता भारी पुलिस सुरक्षा के बीच रजिस्ट्री कार्यालय और जिलाधिकारी (डीएम) कार्यालय परिसर पहुंचा। इसके तुरंत बाद नालियों, फुटपाथों और सार्वजनिक रास्तों पर कब्जा करके बनाए गए अवैध ढांचों को तोड़ने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया। किसी भी संभावित विरोध या हंगामे से निपटने के लिए पीएसी और पुलिस के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रखी थी।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक नहीं मिली वकीलों को राहत

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने नगर निगम को 30 अगस्त तक अदालत परिसर के आसपास बने 72 अवैध कक्षों को हटाने का स्पष्ट निर्देश दिया था। इस आदेश के खिलाफ वकील समुदाय ने देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद प्रशासन ने समय सीमा के भीतर ध्वस्तीकरण की रणनीति को जमीन पर उतार दिया।

100 से अधिक चैंबरों को जारी हुआ था नोटिस

कार्रवाई से पहले लखनऊ नगर निगम ने डीएम कार्यालय, पुरानी हाईकोर्ट और सत्र अदालत के समीप 100 से ज्यादा अवैध ढांचों और दुकानों को चिह्नित करते हुए नोटिस चस्पा किए थे। प्रशासन ने कब्जाधारकों को 29 अगस्त तक खुद अतिक्रमण हटाने की मोहलत दी थी। नोटिस की मियाद पूरी होने से पहले ही कई वकीलों ने अपने चैंबरों से जरूरी फाइलें, दस्तावेज, कुर्सियां, मेज और एसी निकाल लिए थे।

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