दिवाली पर गोलगप्पे खाते ही मच गई चीख-पुकार, देखते ही देखते अस्पताल पहुंचे 150 से ज्यादा लोग!
दिवाली की खुशियों और रोशनी के बीच उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां गोलगप्पे का स्वाद सैकड़ों लोगों की सेहत पर भारी पड़ गया। खेसरहा थाना क्षेत्र में एक फेरीवाले से पानीपूरी खाने के बाद देखते ही देखते 150 से ज्यादा ग्रामीण गंभीर फूड पॉइजनिंग का शिकार हो गए। पेट दर्द, तेज उल्टी और चक्कर आने से तड़पते मरीजों में नन्हे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। त्योहार की रात एक साथ इतने बड़े पैमाने पर लोगों के बीमार पड़ने से पूरे इलाके में कोहराम मच गया।
यह पूरा प्रकरण खेसरहा थाना इलाके के कलनाखोर पेड़ारी और उसके आसपास बसे दो-तीन गांवों का है। शाम के वक्त गांव की गलियों में घूमकर गोलगप्पे बेचने वाले एक स्थानीय विक्रेता के ठेले पर महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ जमा हुई थी। गोलगप्पे खाने के कुछ ही घंटों बाद लोगों के पेट में मरोड़ उठने लगी और एक-एक कर ग्रामीण बेसुध होकर गिरने लगे। रात होते-होते घरों से उल्टियों और कराहने की आवाजें आने लगीं, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
माहौल बिगड़ते देख घबराए परिजन पहले तो मरीजों को स्थानीय झोलाछाप और निजी दवाखानों में लेकर भागे, लेकिन जब दवाइयों का कोई असर नहीं दिखा और मरीजों की तादाद लगातार बढ़ती गई, तो फौरन खेसरहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और नजदीकी पीएचसी में सूचना दी गई। अस्पतालों में एक साथ दर्जनों एंबुलेंस और निजी गाड़ियां पहुंचने से स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। डॉक्टरों ने मरीजों की गंभीर स्थिति और डिहाइड्रेशन को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद सभी प्रभावित ग्रामीणों को आनन-फानन में सिद्धार्थनगर जिला मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
जिला मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार मरीजों के इलाज में जुटी हुई है। हालांकि ज्यादातर मरीजों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, लेकिन पानी की कमी के चलते कुछ मासूम बच्चों की तबीयत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें डॉक्टरों की सघन निगरानी में रखा गया है। त्योहार के मौके पर घटी इस त्रासदी से गांवों में सन्नाटा पसरा है और स्वास्थ्य विभाग खाद्य सामग्री के सैंपल जांच की तैयारी कर रहा है। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले यूपी के बुलंदशहर में भी एक गोद भराई की रस्म के दौरान दावत खाने से करीब 50 से 60 लोग फूड पॉइजनिंग की चपेट में आ चुके हैं।