अखिलेश यादव से मिले CJP नेता, क्या लखनऊ से लड़ेंगे चुनाव? रत्ना सिंह के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राजधानी लखनऊ के सियासी गलियारों में एक नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख पदाधिकारी आशुतोष रांका के बीच हुई गोपनीय मुलाकात के बाद गठबंधन और चुनावी तालमेल को लेकर अटकलों का बाजार गर्म हो गया है।
इस मुलाकात के ठीक बाद एक मीडिया इंटरव्यू में जब सीजेपी नेताओं से यह सवाल पूछा गया कि यदि अखिलेश यादव और राहुल गांधी का समर्थन मिलता है या सपा उन्हें लखनऊ से चुनावी मैदान में उतारने का प्रस्ताव देती है, तो क्या पार्टी नेता चुनाव लड़ेंगे, तो इस पर आए जवाब ने सियासी पंडितों के कान खड़े कर दिए हैं।
चुनाव लड़ने के सवाल पर रत्ना सिंह का दो-टूक जवाब
'द रेड माइक' को दिए एक विशेष इंटरव्यू में सीजेपी के सह-संयोजक सौरभ दास और प्रमुख चेहरा रत्ना सिंह से जब अखिलेश यादव व राहुल गांधी के समर्थन और यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर सीधा सवाल किया गया, तो रत्ना सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, "देखिए, भविष्य में क्या होगा इसका मुझे नहीं पता, क्योंकि मैं पूरी तरह वर्तमान में जीने वाली इंसान हूं। मैं हर फैसला दिन-प्रतिदिन के हिसाब से लेती हूं और उस पल को पूरी शिद्दत से जीती हूं। मुझे नहीं पता कि मैं आगे चलकर सक्रिय राजनीति में आकर चुनाव लड़ूंगी या नहीं, या मैं आगे सीजेपी के साथ रहूंगी या क्या कर रही होऊंगी।" उन्होंने दो-टूक अंदाज में कहा कि वह अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर वही करती हैं जो उनका मन करता है।
जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट में डेढ़ घंटे तक चली बंद कमरे में बैठक
गुरुवार को आशुतोष रांका ने लखनऊ पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के अनुसार, रांका और अखिलेश यादव के बीच यह उच्चस्तरीय बातचीत सपा मुख्यालय के पास स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट के कार्यालय में शाम करीब 4 बजे से शुरू हुई और लगभग डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में चली। बैठक खत्म होने के बाद आशुतोष रांका मीडिया से कोई भी बात किए बिना सीधे रवाना हो गए, वहीं समाजवादी पार्टी ने भी बातचीत के आधिकारिक निष्कर्ष या एजेंडे पर कोई औपचारिक बयान जारी करने से परहेज किया।
सपा ने बताया 'शिष्टाचार और आभार मुलाकात'
मुलाकात को लेकर तेज हुई सियासी चर्चाओं के बीच समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए इसे पूरी तरह गैर-राजनीतिक बताया। सपा प्रवक्ता ने कहा कि सीजेपी प्रवक्ता ने अखिलेश यादव से सिर्फ आभार प्रकट करने के उद्देश्य से मुलाकात की थी। यह शिष्टाचार भेंट इसलिए हुई क्योंकि समाजवादी पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए उनके आंदोलन का खुलकर नैतिक समर्थन किया था और संसद के सदन में भी उनके मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। प्रवक्ता ने साफ किया कि समाजवादी पार्टी सीजेपी के किसी अन्य संगठनात्मक विषय या उनके स्वतंत्र राजनीतिक फैसलों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती।
यूपी चुनाव के लिहाज से क्यों अहम मानी जा रही है यह नजदीकी? आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस बैठक को बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। समाजवादी पार्टी लगातार बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती महंगाई जैसे मुद्दों पर राज्य की मौजूदा भाजपा सरकार को घेर रही है। अखिलेश यादव सरकारी प्राथमिक स्कूलों के बंद होने और शिक्षा के गिरते स्तर पर केंद्र व यूपी सरकार से लगातार कड़े सवाल पूछ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पिछले महीने राजस्थान में 'स्कूल ठीक करो' अभियान के दौरान जब आशुतोष रांका पर कथित हमला हुआ था, तब अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंचों पर इस मामले को जोरदार तरीके से उठाया था। माना जा रहा है कि इस गुप्त वार्ता में छात्र-युवा राजनीति के साथ-साथ 'जेन जी' (Gen Z) और 'जेन अल्फा' से जुड़े युवाओं के मुद्दों पर भी गंभीर मंथन हुआ है।
NDA का ऑफर ठुकरा चुके हैं CJP फाउंडर, दिल्ली में प्रदर्शन जारी
सीजेपी के राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके को केंद्र में सत्तारूढ़ नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने का खुला न्योता दिया था। हालांकि, दीपके ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए गठबंधन के इरादों पर सवाल खड़े कर दिए थे। इस सियासी घटनाक्रम के बीच शुक्रवार को भी कॉकरोच जनता पार्टी का दिल्ली के संसद मार्ग पर विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन जारी रहा, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी गहमागहमी देखने को मिली।