चिता पर जिसका किया था अंतिम संस्कार, 5 साल बाद जिंदा लौटी वही महिला: महराजगंज में बड़ा रहस्य, तो 2021 में कौन जली थी
उत्तर प्रदेश के भारत-नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले के सोनौली कोतवाली क्षेत्र से एक ऐसा हैरतअंगेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और ग्रामीणों दोनों को हैरान कर दिया है।
कैथवलिया उर्फ बरगदही के मल्लाह टोला की रहने वाली इसरावती नाम की महिला पूरे 5 साल बाद सही-सलामत अपने घर लौट आई है। परिवार के लोगों ने जिस महिला को मृत मानकर करीब 5 साल पहले रोहिन नदी के त्रिमुहानी घाट पर मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दे दी थी, उसे अपने सामने जिंदा खड़ा देखकर परिजनों की आंखें खुशी से छलक पड़ीं। वहीं इस घटना ने पूरे इलाके में भारी कौतूहल पैदा कर दिया है।
मानसिक अस्वस्थता, वैवाहिक बिखराव और कोविड काल में हुई थी लापता
पारिवारिक पृष्ठभूमि के अनुसार, इसरावती का पहला विवाह नेपाल के कोटिया क्षेत्र में हुआ था, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण वह रिश्ता टिक नहीं सका। इसके बाद उनकी दूसरी शादी नौतनवां थाना क्षेत्र के लालपुर खोरिया में कराई गई, मगर वहां भी हालात सामान्य नहीं रहे। करीब 5 साल पहले कोरोना महामारी (कोविड काल) के दौरान इसरावती अचानक ससुराल और मायके से रहस्यमय तरीके से गायब हो गई थीं। परिजनों ने उस समय सगे-संबंधियों से लेकर संभावित सभी जगहों पर उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
भटकते हुए पहुंचीं कोलकाता: आश्रम में इलाज के बाद याद आई अपनी पहचान
लापता होने के बाद भटकते-भटकते इसरावती पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर पहुंच गई थीं। वहां एक सामाजिक संस्था की नजर बेसहारा घूम रही इसरावती पर पड़ी, जिन्होंने उन्हें एक दिव्यांग आश्रम में सुरक्षित आश्रय दिलाया। आश्रम में डॉक्टरों की देखरेख में उनका लंबा मानसिक इलाज चला। निरंतर उपचार के बाद जब उनकी मानसिक स्थिति में सुधार हुआ, तो उन्होंने अपनी स्मृति वापस आने पर आश्रम प्रबंधन को अपने मूल गांव, परिवार और महराजगंज जिले का पता बताया। इसके बाद संस्था के पदाधिकारियों ने महराजगंज प्रशासन और स्थानीय संपर्कों के जरिए परिजनों से तालमेल बिठाया और पुष्टि होने पर उन्हें सकुशल घर पहुंचा दिया।
2021 में त्रिमुहानी घाट पर जिसका हुआ था अंतिम संस्कार, वह अज्ञात शव किसका था?
इसरावती के सकुशल घर लौटने के साथ ही कानून और पुलिस जांच के सामने एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लग गया है। दरअसल, वर्ष 2021 में कोल्हुई थाना क्षेत्र के लबदहा गांव के पास एक अज्ञात महिला का शव बरामद हुआ था, जिसे शिनाख्त के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया था। उस समय इसरावती के परिजनों ने शव के कपड़ों, चप्पलों और शारीरिक कद-काठी के आधार पर दावा किया था कि यह शव इसरावती का ही है। परिजनों की शिनाख्त के आधार पर पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाकर शव उन्हें सौंप दिया था, जिसके बाद हिंदू रीति-रिवाज से त्रिमुहानी घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था। अब इसरावती के जिंदा लौटने से यह गहरा रहस्य बन गया है कि 2021 में चिता पर जलाई गई वह अज्ञात महिला आखिर कौन थी।
पुलिस का पक्ष: परिजनों की लिखित पहचान के बाद ही सौंपा गया था शव
इस मामले पर स्थानीय पुलिस का कहना है कि 2021 में मिले अज्ञात शव की पहचान के लिए नियमानुसार व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कराया गया था। परिजनों ने खुद मोर्चरी में पहुंचकर चेहरे, पहनावे और हुलिए के आधार पर महिला को अपनी बेटी बताया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उस वक्त परिजनों द्वारा इसरावती के लापता होने की कोई औपचारिक लिखित गुमशुदगी भी दर्ज नहीं कराई गई थी। परिजनों की पुख्ता शिनाख्त के बाद ही शव का पंचनामा और पोस्टमार्टम कराकर उन्हें सौंपा गया था।
महराजगंज में गलत शिनाख्त का यह पहला मामला नहीं: घुघली में जेल जा चुके हैं निर्दोष परिजन
महराजगंज में शव की गलत पहचान का यह पहला चौंकाने वाला मामला नहीं है। इससे पहले जिले के घुघली थाना क्षेत्र में भी ठीक ऐसा ही सनसनीखेज वाकया सामने आ चुका है। वहां भी एक लापता नाबालिग किशोरी समझकर एक अज्ञात शव की पहचान परिजनों ने कर ली थी। गलत शिनाख्त के चलते पुलिस ने हत्या का मामला मानकर किशोरी के निर्दोष पिता और भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। हालांकि, कुछ समय बाद जब कथित मृत