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सावधान... जिम कॉर्बेट पार्क में अब नहीं ले जा पाएंगे प्लास्टिक की बोतलें, कांच की बोतलों में मिलेगा पानी

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) की सैर करने का शौक रखने वाले वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। अगर आप भी यहाँ जंगल सफारी के दौरान अपने साथ प्लास्टिक की पानी की बोतलें ले जाते हैं, तो अब अपनी यह आदत बदल लीजिए। कॉर्बेट प्रशासन ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने और प्लास्टिक प्रदूषण को जड़ से खत्म करने के लिए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला लिया है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर की गई इस बड़ी घोषणा के तहत, अब कॉर्बेट पार्क के सभी टूरिज्म जोन में प्लास्टिक की बोतलों के इस्तेमाल पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। इसकी जगह सैलानियों को कांच की बोतलों में पीने का पानी दिया जाएगा।

जानिए कब से लागू हो रहा है यह नया नियम

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर साकेत बडोला ने शुक्रवार (5 जून) को इस नए नियम का आधिकारिक एलान किया। उन्होंने बताया कि मॉनसून सीजन की समाप्ति के बाद, जैसे ही इस साल अक्टूबर महीने से नया पर्यटन सीजन शुरू होगा, वैसे ही पार्क में प्लास्टिक की पानी की बोतलों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया जाएगा। इस अनोखी पहल का एकमात्र मकसद कॉर्बेट के नाजुक इकोसिस्टम को बचाना और बेजुबान वन्यजीवों को प्लास्टिक के कचरे से सुरक्षित रखना है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस बदलाव से पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।

कैसे काम करेगा 'डिपॉजिट-रिफंड' सिस्टम और क्या चुकाने होंगे पैसे?

इस नए नियम को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पर्यटकों को इसके लिए अपनी जेब से अतिरिक्त पैसे खर्च करने होंगे? तो इसका जवाब है—हाँ, लेकिन सिर्फ कुछ समय के लिए! अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी व्यवस्था 'डिपॉजिट-रिफंड सिस्टम' के तहत काम करेगी। जब पर्यटक जंगल सफारी के लिए एंट्री गेट पर पहुंचेंगे, तो उनसे पीने के पानी के साथ-साथ कांच की बोतल की एक निश्चित सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी मनी) जमा करवाई जाएगी। जब सैलानी अपनी सफारी पूरी करके रिजर्व से बाहर निकलेंगे, तो तय कलेक्शन सेंटर्स पर उन्हें वह कांच की बोतल सुरक्षित और सही सलामत हालत में वापस सौंपनी होगी। बोतल वापस करते ही पर्यटकों को उनकी पूरी जमा राशि (डिपॉजिट मनी) तुरंत रिफंड कर दी जाएगी। इस सिस्टम से पर्यटक बोतलों को कहीं भी फेंकने के बजाय वापस करने के लिए प्रेरित होंगे।

कॉर्बेट के अंदर ही लगेगा हाईटेक बॉटलिंग प्लांट

इस महत्वाकांक्षी योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के भीतर ही एक अत्याधुनिक बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है। खास बात यह है कि इन दोबारा इस्तेमाल होने वाली कांच की बोतलों का निर्माण और इनमें शुद्ध पेयजल भरने का काम इसी रिजर्व के अंदर बने प्लांट में किया जाएगा। डायरेक्टर साकेत बडोला ने बताया कि वर्तमान में यहाँ आने वाले पर्यटक 'यूज़ एंड थ्रो' वाली प्लास्टिक बोतलों पर काफी निर्भर रहते हैं। हालांकि पहले भी इन बोतलों को बाहर डिस्पोज़ करने की व्यवस्था थी, लेकिन फिर भी प्लास्टिक का कचरा पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा था, जिसके चलते अब यह ठोस कदम उठाना पड़ा है।

नए पर्यटन सीजन से पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' होगा कॉर्बेट

कॉर्बेट पार्क प्रशासन लंबे समय से इस पूरे फॉरेस्ट एरिया को इको-फ्रेंडली और प्लास्टिक-फ्री बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि पार्क के अधिकांश टूरिज्म जोन पहले ही काफी हद तक प्लास्टिक मुक्त किए जा चुके हैं। अब अक्टूबर से लागू होने वाली इस कांच की बोतल की नई व्यवस्था के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि देश का यह सबसे पुराना और लोकप्रिय टाइगर रिजर्व लगभग शत-प्रतिशत प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त हो जाएगा, जो देश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल बनेगा।

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